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Thursday, November 24, 2016

वैदिक सभ्यता (1500- 600 इसा पूर्व )


●वैदिक संस्कृति का काल -1500~600 ईसा पूर्व माना गया हैं।
●वैदिक सन्कृतिक को अध्ययन की सुविधा के विचार से - दो भागो में बाटां गया हैं । 1.पुर्व वैदिक/ऋग्वैदिक काल 2.उत्तर वैदिक काल
●ऋग्वैदिक काल का समय- 1500~1000 ईसा पुर्व।
● उत्तर वैदिक काल का समय- 1000-600 ईसा पूर्व
● आर्य शब्द का शाब्दिक अर्थ- श्रेष्ठ या कुलीन होता है ।
●आर्य गाँव में निवास करते थे ।


● आर्यों को तम्बाकु के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं था ।
● उत्तर वैदिक काल मे कुछ वेदविरोधी और ब्राह्मण विरोधी हो गये थे, उसे श्रमण कहा जाता था ।
● सिंधु घाटी की सभ्यता और वैदिक सभ्यता में प्रमुख अंतर है की- पहली
नगरिया थी , जबकि दूसरी ग्रामीण
● ऋग्वेदकाल में समिति के सभापति को ‘ईशान’ नाम से सम्बोधित किया जाता था।
● उत्तर वैदिक काल में आर्यो की गतिविधि का केन्द्र यमुना से पश्चिमी बंगाल प्रदेश तक था ।
● यजुर्वेद गद्य तथा पद्य दोनों में हैं ।
● गायत्री मंत्र में सविता देवी की प्रार्थना की गई है ।
● मैक्स मुलर ने आर्यों का निवास स्थान मध्य एशिया को माना है । लेकिन अभी तक इसके कोई प्रमाण नही मिले हँ ।
● आर्यों द्वारा विकसित सभ्यता को ही वैदिक सभ्यता कहते है ।( नोट - आर्य शब्द किसी जाती का नाम नही था । श्रेष्ठ व्यक्ति को आर्य कहा जाता था । लेकिन अंग्रेजो ने आर्य को जाती मान लिया और अभी तक हम अंग्रेजो की ही पढाई पढ़ रहे है ।)
● आर्यों की भाषा संस्कृत थी ।
● आर्यों का प्रशासन बढ़ते क्रम में इन पाँच भागो में बटा था - कुल ,ग्राम , जन , विश , राष्ट्र ।
● ग्राम के मुखिया ग्रामिणी कहलाता था ।
● विश का प्रधान विश्पति कहलाता था ।
● जन के शासक को राजन कहते थे ।
● राज्य के अधिकारियो में पुरोहित एवं सेनानी को प्रमुख माना जाता था ।
● उतर वैदिक काल में पूरब दिशा को प्राची , पश्चिम को प्रतीची और उतर को उदीची कहा जाता था ।
● उत्तर वैदिक काल में पूर्व दिशा के राजा को -सम्राट , पश्चिम के राजा को स्वराष्ट्र, उतर के राजा को विराट , दक्षिण के राजा को भोज और मध्य के राजा को राजा ही कहा जाता था ।
● जनता की गतिविधियों को देखने वाले गुप्तचर को - पुरप एवं स्पश कहा जाता था ।
● गोचर भूमी के अधिकारी को - वाजपति कहा जाता था ।
● वैदिक काल में जो अपराधियों को पकड़ता था उसे उग्र कहते थे ।
● राजा को सलाह देने वाली संस्था का नाम - सभा एवं समिति था ।
● सभा बड़े अधिकारियो के लिए बनाई गयी संस्था थी । जबकि समिति जनता के लिए थी ।
● सभा एवं समिति के अध्यक्ष को ईशान कहा जाता था ।
● वैदिक काल में युद्ध ज्यादातर गायों के लिए होती थी । वे अपने पास ज्यादा से ज्यादा गाय रखना चाहते थे ।
● युद्ध में गविष्टी शब्द का प्रयोग हुआ है , जिसका अर्थ होता था - गायों की खोज ।
● दसराज्ञ युद्ध का उल्लेख ऋग्वेद के सातवे मंडल में मिलता है

● दसराज्ञ युद्ध का मतलब 10 राजाओ के साथ युद्ध है , जिसका वर्णन ऋग्वेद के 7वे मंडल में है ।

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