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Sunday, November 27, 2016

दैनिक समसामयिकी 26 November 2016(Saturday)

1.कोलंबिया : 52 साल की हिंसा रोकने के लिए 60 दिनों में दूसरी बार समझौता
• कोलंबिया में सरकार और विद्रोही समूह फार्क ने संशोधित शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। 52 साल से जारी हिंसा को समाप्त करने के लिए 60 दिनों में हुआ यह दूसरा समझौता है।
• इससे पहले 26 सितंबर को शांति समझौता हुआ था जो दो अक्टूबर को हुए जनमतसंग्रह में खारिज कर दिया गया था।
• नए समझौते पर जनता का मत नहीं लिया जाएगा। इसे अनुमोदन के लिए संसद में भेजा गया है। बहस के बाद अगले सप्ताह इसके पारित होने की उम्मीद है।

• सदन में राष्ट्रपति जुआन मैन्यूअल सांतोस और उनके सहयोगियों को बहुमत प्राप्त है। इससे पहले गुरुवार को राजधानी बगोटा में आयोजित सादे समारोह में राष्ट्रपति सांतोस और फार्क के नेता रोडिगो ‘टिमोचेंको’ लोंडोनो ने इस्तेमाल हो चुके कारतूस से बनी कलम से नए समझौते पर हस्ताक्षर किए।
• हस्ताक्षर के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि नए समझौते में कोलंबियाई लोगों के विचार और उम्मीदों को शामिल किया गया है। हम सभी की अंतरात्मा जानती है कि सशस्त्र संघर्ष की कीमत बहुत भारी है। गौरतलब है कि आधी सदी से ज्यादा समय से चल रहे हिंसा के कारण कोलंबिया में करीब दो लाख 60 हजार लोग मारे जा चुके हैं और लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। जनमत संग्रह के नतीजों के बाद हिंसा का नया दौर शुरू होने की आशंका बढ़ गई थी।
• नए समझौते के लिए सरकार और फार्क दोनों पर भारी दबाव था। इतना ही नहीं संघर्ष समाप्त करने के प्रयासों के लिए इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले सांतोस पर इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव भी था।
• आलोचक नए समझौते का भी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि समझौते में किए गए संशोधन लीपापोती हैं और इसमें फार्क द्वारा किए गए युद्ध अपराधों के लिए अब भी माफी का प्रावधान है। गुरुवार को बगोटा में समझौते के विरोध में प्रदर्शन भी किए गए।
• पूर्व राष्ट्रपति अल्वारो उरिबे ने सरकार से विद्रोहियों को माफी देने सहित समझौते के उन मूल मसलों पर फिर से जनमतसंग्रह कराने को कहा है कि जिन पर विवाद है।
2. विज्ञान से मजबूत बनेंगे भारत-मॉरीशस रिश्ते
• मॉरीशस की पहली महिला राष्ट्रपति डॉ. अमीना गुरीब फकीम मानती हैं कि भारत व मॉरीशस के बीच विज्ञान और प्रोद्योगिकी के जरिए रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं। फकीम खुद भी वैज्ञानिक हैं और वह मानती हैं कि इसका लाभ न केवल व्यापार बढ़ाने में मिलेगा, बल्कि आम लोगों के जीवन में गुणात्मक सुधार भी हो सकेगा। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच साझा शोध कार्यो के साथ उन कई संभावनाओं पर भी काम करने की जरूरत है जो देश हित में हैं।
• राष्ट्रपति फकीम ने शुक्रवार को राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआइ) का भ्रमण किया। गार्डन में चंदन का पौधा रोपने के बाद उन्होंने साइकस व साइकेड हाउस देखा।
• इसके बाद म्यूजियम गईं। संस्थान में साइकस व साइकेड का संग्रह देख वह अभिभूत हो गईं। एनबीआरआइ, सीमैप, सीडीआरआइ व बीरबल साहनी पुरासाइंसेस संस्थान के वैज्ञानिकों से रू-ब-रू हुईं। वैज्ञानिकों ने संस्थान में किए जा रहे शोध कार्यो की जानकारी दी।
• उन्होंने कहा कि भारत के साथ सांस्कृतिक रिश्ते बहुत पुराने व मजबूत हैं। अब विज्ञान के क्षेत्र में भी दोनों देश सहयोग करेंगे। उन्होंने बताया कि 20 साल पहले जब वह शोधार्थी के तौर पर भारत आईं थीं तब उन्हें एनबीआरआइ आने का भी मौका मिला था। अब एक बार फिर यहां आकर उन्हें बहुत अछा महसूस हो रहा है।
• डॉ. फकीम ने कहा कि दोनों देशों की संस्कृतियां ही मिलती-जुलती नहीं हैं बहुत सारे पेड़-पौधे भी एक समान हैं। एनबीआरआइ में पौधों के मानकीकरण का काम किया गया है।
• ऐसा ही कार्य मॉरीशस में भी हुआ है। ऐसे में दोनों ही देश पौधों का तुलनात्मक अध्ययन कर सकते हैं। जहां तक हर्बल फामरुलेशन को बढ़ावा देने की बात है मॉरीशस भारत के लिए अफ्रीकी देशों की तरफ बढ़ने का गेट-वे साबित हो सकता है।
• दरअसल, मॉरीशस में क्लीनिकल ट्रायल आदि के जो नियम हैं वही नियम अफ्रीकी देशों में भी मान्य हैं। ऐसे में मॉरीशस की कंपनियां हर्बल फामरूलेशन के ट्रायल के लिए मददगार हो सकती हैं। उन्होंने संक्रामक रोग, डायबिटीज, एंटीएजिंग दवाओं आदि के लिए साझा शोध की जरूरत बताई।
शोध में संभावनाएं
• ऐसे पौधे जो दोनों देशों में पाए जाते हैं उन पर किए गए शोध को साझा करना
• हर्बल फार्मूलेशन के जरिए बिजनेस को बढ़ावा देना
• मॉरीशस के जरिए भारत को अफ्रीकी देशों में व्यापार का अवसर मिल सकता है
• एनबीआरआइ व मॉरीशस कंपनियां वनस्पतियों के मानकीकरण के लिए कार्यों को साझा कर तुलनात्मक अध्ययन कर सकती हैं
• अफ्रीकी देशों में आयुष के व्यापार के लिए मॉरीशस स्थित कंपनियों के सहयोग से क्लीनिकल परीक्षण कराए जा सकते हैं
3. चीन की नई चाल, ग्वादर में तैनात करेगा युद्धपोत
• पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर चीनी नौसेना युद्धपोतों की तैनाती करेगी। रणनीतिक तौर पर अहम यह बंदरगाह चीन-पाक आर्थिक गलियारे का हिस्सा है। पाकिस्तान के एक नौसैन्य अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि गलियारे की सुरक्षा के लिए चीन ने पाकिस्तानी नौसेना के साथ मिलकर यह रणनीति तैयार की है।
• चीन की यह योजना भारत के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। गुलाम कश्मीर से होकर गुजरने वाले इस गलियारे को लेकर भारत पहले ही अपनी चिंताओं से चीन को अवगत करा चुका है। तीन हजार किलोमीटर लंबा गलियारा पाकिस्तान के ग्वादर को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ता है।
• इसका निर्माण पूरा होने के बाद मध्य-पूर्व एशिया और अफ्रीका तक चीन की पहुंच आसान हो जाएगी। इससे पहले चीन ने इस बंदरगाह पर पोतों की तैनाती से इन्कार किया था।
• विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक गलियारे से चीन और पाकिस्तान दोनों की सैन्य क्षमता में इजाफा होगा। चीनी नौसेना की अरब सागर तक पहुंच आसान हो जाएगी।
• ग्वादर में नौसैन्य अड्डा होने से चीन के लिए हंिदू महासागर के अपने बेड़ों की मरम्मत और रखरखाव भी आसान हो जाएगा। अखबार एक्सप्रेस टिब्यून ने एक नौसैन्य अधिकारी के हवाले से बताया है कि पाकिस्तान भी ग्वादर बंदरगाह पर स्पेशल स्क्वाड्रन तैनात करेगा।
• एक स्क्वाड्रन में चार से छह युद्धपोत होंगे। अधिकारी ने बताया कि अत्यंत तीव्र गति की ये पोतें जल्दी लाई जाएंगी। इसके लिए चीन और तुर्की से बातचीत चल रही है। दो पोत पहले से ही ग्वादर में तैनात हैं।
अखबार ने एक अन्य अधिकारी के हवाले से बताया है कि ग्वादर में क्षेत्र का सबसे बड़ा शिपयार्ड बनाने की भी योजना है। कराची स्थित पोर्ट कासिम में एक छोटे जहाज के निर्माण का प्रोजेक्ट लगाने का काम भी शुरू किया जा सकता है। अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉरपोरेशन नई जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में तुर्की की मदद से कॉरपोरेशन बड़े फ्लीट टैंकर बनाएगा।
4. सरकार ई-हेल्थ पर लाएगी कानून
• सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह ई-हेल्थ पर कानून लाएगी। इसमें व्यापक सुधारों समेत नागरिक और आपराधिक उपाय किए जाएंगे।लोकसभा में स्वास्थ्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लिखित जवाब में कहा, ‘मंत्रालय (स्वास्थ्य) ने इलेक्ट्रानिक हेल्थ, डाटा, प्राइवेसी और सिक्युरिटी के संबंध में कानून लाने का निर्णय लिया है।
• प्रस्तावित कानून में लोगों के ई-हेल्थ डाटा की सुरक्षा के लिए कानूनी तंत्र समेत व्यापक पहलुओं को दायरे में लाया जाएगा।’ मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी सरकार ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रमुख संकेतक जैसे मातृ मृत्यु दर में वैश्विक दर की तुलना में तेज गिरावट आई है।
• स्वास्थ्य राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने लिखित जवाब में लोकसभा में कहा कि देश में पांच साल से कम उम्र के बचों की मृत्युदर में कमी आई है। इसके अलावा दूसरी बीमारियों की वजह से होने वाली मौतों में भी गिरावट आई है।
5. नालंदा विश्वविद्यालय के चांसलर जार्ज यो ने त्यागपत्र दिया
• नालंदा विश्वविद्यालय के चांसलर जार्ज यो ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेजे अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि उनसे बगैर सलाह मशविरा किए विश्वविद्यालय के गवर्निग बोर्ड को भंग किया गया।
• इससे साबित होता है कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को प्रभावित किया जा रहा है, अगर ऐसा नहीं होता तो गवर्निग बोर्ड भंग करने के पहले उन्हें नोटिस जरूर दिया जाता।
• इस्तीफा देने के साथ ही यो ने विश्वविद्यालय के गवर्निग बोर्ड के पूर्व सदस्यों को भेजे एक बयान में कहा कि जिस भी परिस्थिति में नालंदा विश्वविद्यालय में नेतृत्व परिवर्तन किया गया वह इसके विकास के लिए परेशानी पैदा करने वाला है।
• यो ने अपने बयान में साफ किया कि गवर्निग बोर्ड को भंग किए जाने के पीछे स्थानीय राजनीति है, जिसमें वे शामिल नहीं होना चाहते। उन्होंने कहा कि मैं भारतीय नागरिक नहीं हूं और आज मैं जो कह रहा हूं उससे ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहता। नालंदा प्रोजेक्ट के दौरान 2010 में जब नालंदा विश्वविद्यालय का एक्ट पास हुआ उस दौरान लोकसभा और राज्य सभा में इसे तमाम राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल हुआ था।
• मैंने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ काम किया है। मैं आज भी नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना के वक्त जो सिद्धांत तय किए गए थे उनके साथ हूं। यो ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय एक विचार है, जिसकी आज सबसे ज्यादा प्रासंगिकता है।
• यह वह संस्था है जो हम जैसे किसी भी व्यक्ति से बड़ी है। उन्होंने कहा कि पूर्व में कहा गया था कि एक्ट में संशोधन होगा और इसके बाद ही नए गवर्निग बोर्ड का गठन किया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मेरा मानना है कि यह भारत सरकार का विशेषाधिकार है।
6. आज से चलेगा मजदूरों के बैंक खाते खोलने का अभियान
• नोटबंदी की तकलीफ कम करने के लिए केंद्र सरकार अब संगठित और असंगठित क्षेत्र के उन मजदूरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिनके पास अभी बैंक खाते नहीं हैं।
• सरकार ऐसे मजदूरों का बैंक खाता खोलने के लिए एक विशेष अभियान चलाने जा रही है। पूरे देश में इसके लिए शनिवार से विशेष कैंपों का आयोजन किया जाएगा।
• नोटबंदी के बाद हालात की समीक्षा के लिए बुलाई गई बैठकों में यह बात सामने आई कि अब भी संगठित और असंगठित क्षेत्र के कई मजदूरों के पास बैंक खाते नहीं हैं।
• ऐसे लोगों को कैशलेस समाज का हिस्सा बनने में दिक्कत आएगी। लिहाजा श्रम एवं रोजगार मंत्रलय को इन लोगों के खाते खुलवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्रलय ने शनिवार से देश के प्रत्येक जिले में खाता खोलने संबंधी कैंप लगाने का फैसला लिया है।
• श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने बताया कि सभी रायों को इस संबंध संदेश भेज दिया गया है। सभी प्रदेश सरकारों से इस अभियान में सहयोग करने का आग्रह किया गया है। जिलाधिकारी, बैंक के लीड जिला मैनेजर और श्रम कार्यालय के अफसर खाता खोलने की प्रक्रिया का निर्धारण करेंगे।
• हालांकि मंत्रलय को अभी इस बात की स्पष्ट जानकारी नहीं है कि देश में ऐसे कितने मजदूर हैं, जिनके पास बैंक खाता नहीं है। चूंकि सरकार 2014 में शुरू हुई जन धन योजना के तहत अब तक 25 करोड़ बैंक खाते खोल चुकी है।
• लेकिन नोटबंदी के बाद सरकार को इस तरह की जानकारी मिल रही थी कि कई जगहों पर असंगठित और संगठित दोनों क्षेत्रों में ऐसे मजदूर हैं, जिनके पास बैंक खाता नहीं है। ऐसे मजदूर नकद मजदूरी प्राप्त करते हैं। नोटबंदी के बाद इन्हें अपनी मजदूरी लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
7. विनाश के कगार पर यूनेस्को की संरक्षित 55 धरोहर
• यूं तो विश्वभर में यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन) संरक्षित 1052 विश्व धरोहर हैं, मगर इसका मतलब यह नहीं कि सभी के संरक्षण का अकेला ठेका इसी संगठन का है। क्योंकि ये धरोहर विश्व के 163 देशों में स्थापित हैं और इनके संरक्षण की जिम्मेदारी सीधे तौर पर इन्हीं देशों की है।
• गंभीर यह कि तमाम देश अपने यहां की विश्व धरोहरों के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहे। फलस्वरूप दुनिया में 55 विश्व धरोहर विनाश की कगार पर आ चुकी हैं।
• यह तथ्य यूनेस्को कैटेगरी-दो केंद्रों की देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान में आयोजित वार्षिक बैठक में निदेशक (विश्व धरोहर) एम. रोसलर ने रखा।
• उन्होंने बताया कि यूनेस्को को विश्व धरोहरों की अनदेखी की करीब 100 शिकायतें रोज मिल रही हैं। रोसलर ने कहा कि संगठन अकेले अपने दम पर विश्व धरोहरों का संरक्षण करने में कामयाब नहीं हो सकता। यूनेस्को सिर्फ तकनीक, वित्तीय आदि की मदद ही मुहैया करा सकता है।
• इससे आगे भौतिक रूप से संबंधित देशों और वहां के नागरिकों को ही इन अनमोल धरोहरों के संरक्षण का प्रयास करना होगा। विश्व धरोहरों का निर्माण दोबारा संभव नहीं, इनका संरक्षण करके ही इन्हें सदियों तक महफूज रखा जा सकता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि विश्व युद्ध प्रथम व द्वितीय के स्मारकों से वहां के लोगों का कोई लेना-देना नजर नहीं आता।
• भारत में विश्व धरोहरों के प्रति अनदेखी पर यूनेस्को निदेशक ने कहा कि यहां लोग विश्व धरोहरों का भ्रमण उसकी महत्ता से अधिक पिकनिक स्पॉट के रूप में कर रहे हैं। इसके चलते इन्हें निरंतर नुकसान पहुंच रहा है।
Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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