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Monday, November 28, 2016

दैनिक समसामयिकी 27 November 2016(Sunday)

1.जजों की नियुक्ति पर न्यायपालिका तथा सरकार के मध्य तकरार
• जजों की नियुक्ति पर चल रही तनातनी के बीच शीर्ष न्यायपालिका और सरकार की तकरार एक बार फिर खुले रूप में सामने आई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने एक बार फिर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उच न्यायालयों में जजों के 500 पद खाली पड़े हैं।
• इसी तरह न्यायाधिकरणों में भी जजों को सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। इसके चलते सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वहां नहीं जाना चाहते।
• ठाकुर के इस बयान पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी तत्काल पलटवार किया और कहा कि कानून बनाने का काम विधायिका के जिम्मे ही रहना चाहिए। समस्याओं का समाधान तभी होगा, जब सभी अंग साथ मिलकर काम करेंगे। 

• अदालत निर्देश जारी करे, सरकार के आदेशों को खारिज करे, लेकिन प्रशासन चलाने का काम उन्हीं लोगों के हाथ में रहे जिनको सरकार चलाने के लिए चुना गया है। प्रसाद ने याद दिलाया कि भारतीय संविधान की दुनियाभर में इजत है, क्योंकि यह अमीर-गरीब या छोटे-बड़े में कोई फर्क नहीं करता।
• लोगों को भरोसा है कि वे किसी भी राजनेता को सत्ता से हटा सकते हैं। किसी भी राजनीतिक पार्टी को हटा सकते हैं।
• चीफ जस्टिस ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के वार्षिक सम्मेलन में जजों की नियुक्ति में विलंब को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
• इसके अलावा तमाम टिब्यूनलों की खस्ताहाली को लेकर भी सरकार की खिंचाई की। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरणों में भी जजों की संख्या में भारी कमी है। जजों की कमी और सुविधाओं के अभाव में न्यायाधिकरण अलग बेंच नहीं स्थापित कर पा रहे।
• इसके चलते मुकदमे पांच से सात साल तक लंबित रह रहे हैं।द्यचीफ जस्टिस ठाकुर ने हाई कोर्ट में जजों के रिक्त पद का मुद्दा उठाया
• कानून मंत्री ने कहा, प्रशासन चलाने का काम सरकार के पास ही.इस समय देश में अदालत के अनेक कक्ष खाली हैं। इनके लिए जज उपलब्ध नहीं हैं। बड़ी संख्या में प्रस्ताव लंबित हैं। उम्मीद है सरकार इस संकट को खत्म करने के लिए इसमें हस्तक्षेप करेगी।
2. लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं : कुरैशी
• लोकसभा और देश भर की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ करवाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने भी सहमति जताई है।
• उन्होंने कहा है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का विचार बेहद अछा है। लगातार होते रहने वाले चुनावों की वजह से सरकार के फैसले अटक जाते हैं।
• कुरैशी ने देश भर में ये सभी चुनाव साथ कराने के विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में शनिवार को कहा, ‘लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव बहुत अछा विचार है।’
• इसी तरह उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान लगने वाली अवधि को भी घटाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार चुनाव प्रक्रिया के लिए जरूरी अर्धसैनिक बलों की उपलब्धता सुनिश्चित कर सके तो आयोग इस काम को और कम समय में पूरा कर सकता है।
• पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक चुनाव की अवधि को कम करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि जितने दिनों तक आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू रहती है, सरकार के सभी प्रमुख फैसले लटके रहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि चूंकि देश लगातार चुनाव के माहौल में रहता है, इसलिए जाति और धर्म के मुद्दे भी लगातार छाए रहते हैं।
• चुनाव के जाने के बाद ये मद्दे भी शांत हो जाते हैं। अगर एक साथ चुनाव करवाए जा सके तो इससे इन मुद्दों को भी कमजोर किया जा सकेगा।
• संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि काला धन के खिलाफ उठाए गए नोटबंदी के कदम के बाद अब वे चुनाव सुधार को ले कर भी गंभीर कदम उठाना चाहते हैं।
• उन्होंने सभी पार्टियों को प्रस्ताव किया था कि अगर वे सहमत हों तो देश भर में सभी चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं।
3. इन्फ्रास्ट्रक्चर, विदेश व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में निरंतर निवेश जरूरी
• पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा है कि सात से साढ़े सात फीसद की विकास दर को बनाए रखने के लिए अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी।
• उन्होंने कहा कि खासतौर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर और विदेश व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में निरंतर निवेश होता रहना चाहिए।
• भारत में आर्थिक सुधारों के जनक माने जाने वाले डॉ. सिंह ने पीएचडी चैंबर आफ कॉमर्स के सालाना अधिवेशन में अपने संबोधन में कहा कि आर्थिक नीतियों का निर्धारण इस प्रकार किया जाना चाहिए जिससे विकास की प्रक्रिया बाधित न हो।
• इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि समेकित विकास की जरूरतों का सरकारी खर्च, वित्तीय स्थिरता, रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के साथ समन्वय बनाया जाए। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हालांकि अब भी सात से साढ़े सात फीसद की दर से विकास कर रहा है। लेकिन इस दर को बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि अर्थव्यवस्था में निरंतर निवेश की गति बनी रहे।
• उन्होंने कहा कि भारत अब 1991 की आर्थिक सुधारों के दौर से निकलकर सतत विकास के दौर में प्रवेश कर रहा है। इसलिए अब देश की प्राथमिकता न केवल इस रफ्तार को तेज करने पर होनी चाहिए बल्कि विकास के बहुआयामी पक्षों, इक्विटी, समेकित रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण पर भी पूरा ध्यान होना चाहिए।
• सिंह ने कहा कि ऐसे वक्त में उच्च शिक्षा, गरीबी उन्मूलन और कुपोषण जैसी चुनौतियों की पहचान भी बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गरीबी दूर करने के लिए आर्थिक विकास और उसकी स्थिरता इसके अनिवार्य पहलू हैं।
• पीएचडी की सालाना बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने भी हिस्सा लिया।
4. सरकार ने सार्वजनिक किया जीएसटी क्षतिपूर्ति कानून का मसौदा
• देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद रायों को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई केंद्र प्रत्येक तिमाही पर करेगा। लेकिन अंतिम तौर पर सालाना मुआवजे की राशि का फैसला नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) के ऑडिट के बाद ही तय किया जाएगा।
• इस क्षतिपूर्ति का भुगतान जीएसटी के तहत लक्जरी व तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले अतिरिक्त सेस से प्राप्त राजस्व से किया जाएगा।
• सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक यह सेस (उपकर) जीएसटी लागू होने के पहले पांच साल के लिए लगाया जाना है। इस दौरान जितनी धनराशि जीएसटी कंपनसेशन फंड के तहत इकट्ठा होगी, उसे रायों और केंद्र के बीच बांट दिया जाएगा।
• यह बात जीएसटी क्षतिपूर्ति कानून के मसौदे में कही गई है। इस मसौदे को सरकार ने सार्वजनिक चर्चा के लिए शनिवार को जारी किया।
• मसौदे के मुताबिक सेस से एकत्र फंड के पांच साल बाद बचने वाले हिस्से का आधा भाग देश की समेकित निधि में जमा होगा। इस प्रकार यह राशि देश के कुल कर संग्रह का हिस्सा बन जाएगी।
• बाद में तय नियमों के मुताबिक इसे आनुपातिक आधार पर रायों और सरकार के बीच बांट दिया जाएगा। बाकी पचास फीसद हिस्से को रायों के बीच उन्हें एक वर्ष पहले प्राप्त एसजीएसटी राजस्व संग्रह के अनुपात में बांटा जाएगा।
• इस मसौदे के मुताबिक अगर कैग के ऑडिट के मुताबिक रायों को मिले मुआवजे की रकम उसकी निर्धारित मात्र से अधिक पाई गई तो उसे अगले वित्त वर्ष में समायोजित कर दिया जाएगा। रायों को होने वाले राजस्व नुकसान का आकलन जीएसटी के तहत प्राप्त होने वाले राजस्व और पुरानी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के तहत मिलने वाले राजस्व के अंतर से होगा।
• पुरानी व्यवस्था के अंतर्गत मिले राजस्व में 2015-16 को आधार वर्ष मानते हुए 14 फीसद वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है।
• मुआवजा कानून के इस मसौदे पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल अपनी अगली बैठक में विचार करेगी। काउंसिल की बैठक आगामी 2-3 दिसंबर को होनी है। काउंसिल इससे पूर्व जीएसटी के टैक्स ढांचे के तहत कर की चार दरों का प्रस्ताव कर चुकी है।
• केंद्र ने जीएसटी मुआवजा बिल को सार्वजनिक किया
• खातों की लेखा परीक्षा के बाद ही तय होंगे अंतिम आंकड़े
• नुकसान की भरपाई के लिए लगाया जाएगा उपकर
• भोग विलासिता और तंबाकू जैसे उत्पादों पर लगेगा यह कर
• जीएसटी लागू होने के बाद पांच साल तक जारी रहेगा यह उपकर
• इस उपकर से बनाया जाएगा 50,000 करोड़ रपए का कोष
• जीएसटी परिषद की 2 व 3 दिसम्बर को होगी बैठक

5. रूस भी कर सकेगा ग्वादर बंदरगाह का इस्तेमाल
• रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह का अब रूस भी इस्तेमाल कर सकेगा। व्यापार के लिए बंदरगाह का इस्तेमाल करने के रूसी प्रस्ताव को पाकिस्तान ने मंजूरी दे दी है।
• पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से जियो न्यूज ने शनिवार को यह जानकारी दी। ईरान और तुर्कमेनिस्तान के बाद रूस ऐसा तीसरा देश है जिसे पाक ने इस तरह की इजाजत दी है।
• रिपोर्ट के अनुसार रूस ने चीन-पाक आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) का हिस्सा बनने और पाकिस्तान के साथ रणनीतिक रक्षा संबंध विकसित करने की भी इछा जताई है। यह शीतयुद्धकाल के प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच बढ़ती करीबी का संकेत है।
• विशेषज्ञों के अनुसार रूस के साथ संबंधों को मजबूती देने के लिए पाकिस्तान आतुर है। एफ-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री पर अमेरिकी रोक के बाद इस्लामाबाद को एक ऐसे साथी की तलाश है जो उसकी रक्षा जरूरतों को पूरा कर सके।
• तुर्कमेनिस्तान के दौरे पर गए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी सीपीईसी का हिस्सा बनने के रूसी प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आधी दुनिया को लाभ पहुंचाने वाली इस परियोजना में कई देश शामिल होना चाहते हैं।
• शरीफ ने दक्षिण और मध्य एशिया के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए तुर्कमेनिस्तान-पाकिस्तान-अफगानिस्तान-भारत (तापी) के साथ 1,680 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन के किनारे रेलवे, सड़क और फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाने की भी घोषणा की।
• गौरतलब है कि तीन हजार किलोमीटर लंबा सीपीईसी गुलाम कश्मीर से होकर गुजरता है। भारत की आपत्तियों को दरकिनार कर चीन इस परियोजना को आगे बढ़ा रहा है।
• इसके पूरा होने पर मध्य-पूर्व एशिया और अफ्रीका तक उसकी पहुंच आसान हो जाएगी। पाकिस्तानी नौसेना ने शुक्रवार को बताया था कि ग्वादर बंदरगाह पर चीनी नौसेना अपने पोतों की तैनाती भी करेगी।
6. कमर जावेद बाजवा होंगे पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख
• लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा पाकिस्तान के अगले सेना प्रमुख होंगे। उनके नाम को शनिवार को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने स्वीकृति दी। वह 29 नवंबर को अवकाश ग्रहण कर रहे जनरल राहील शरीफ का स्थान लेंगे। उन्हें कश्मीर मामले का अछा जानकार माना जाता है।
• पाकिस्तानी सूत्र बताते हैं कि वह जेहादी ताकतों को पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा भी मानते हैं। आने वाला समय बताएगा कि कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों को पाकिस्तानी सेना की मदद में इजाफा होगा या कमी आएगी।
• बाजवा संख्या के लिहाज से दुनिया की छठवीं सबसे बड़ी सेना के प्रमुख होंगे, जो इस समय नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना के साथ वार-प्रतिवार कर रही है। बाजवा कोंगो में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में भी काम कर चुके हैं, जहां पर वह भारत में सेना प्रमुख रह चुके जनरल बिक्रम सिंह के मातहत थे।
• लेफ्टिनेंट जनरल जुबैर हयात को वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति मामनून हुसैन ने दोनों अधिकारियों को प्रोन्नत कर दिया है।
• पाकिस्तान में सेना का वहां की राजसत्ता में प्रभावशाली दखल है। सेना के प्रभाव से ही वहां की विदेश नीति तय होती है और जनता द्वारा चुनी हुई सरकार काम करती है।
• उल्लेखनीय है कि जनरल शरीफ पिछले 20 साल में पहले ऐसे सेना प्रमुख हैं, जो निर्धारित सेवाकाल के बाद अवकाश ग्रहण कर रहे हैं। उन्हें कोई सेवा विस्तार नहीं मिला है।
7. नहीं रहे भारत के दोस्त कास्त्रो
• पड़ोस में रहकर करीब 50 साल तक अमेरिका की आंखों की किरकिरी बने रहे फिदेल कास्त्रो (90) ने शुक्रवार को हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं। वह दुनिया में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में ही शुमार नहीं थे बल्कि साम्यवादी व्यवस्था के स्तंभ थे, जो सोवियत संघ टूटने के बाद भी नहीं दरका।
• कास्त्रो भारत के अभिन्न मित्र थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से शुरू हुआ दोस्ती का यह सिलसिला इंदिरा गांधी तक प्रगाढ़ रूप में कायम रहा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी है। साम्रायवादी व्यवस्था के विरोधी कास्त्रो ने क्यूबा में शोषण के खिलाफ लड़कर 1959 में साम्यवादी सत्ता स्थापित की थी।
• ताजिंदगी हरे रंग की मिलिट्री पोशाक पहनने वाले कास्त्रो ने अमेरिका की दहलीज पर रहते हुए भी अपने देश में पूंजीवादी व्यवस्था को घुसने नहीं दिया। शायद इसी का नतीजा रहा कि क्यूबा को आज भी दुनिया की सबसे खुशहाल आबादी वाले देशों में गिना जाता है।
• क्रांति के दिनों में फिदेल का नारा दुनिया में बहुत प्रचलित हुआ। वह कहते थे- रुको नहीं, आगे बढ़ते रहो- जब तक विजय न मिल जाए। सन 2006 से कास्त्रो की तबीयत खराब चल रही थी। दो साल बाद उन्होंने सत्ता अपने छोटे भाई राउल कास्त्रो को सौंप दी लेकिन पर्दे के पीछे असली ताकत वही बने रहे।
• क्यूबा के समयानुसार शुक्रवार रात साढ़े दस बजे राष्ट्रपति राउल कास्त्रो ने सरकारी टेलीविजन से घोषणा की कि क्यूबा की क्रांति के सवरेच कमांडर फिदेल अब नहीं हैं। अंतिम संस्कार चार दिसंबर को होगा।
• फिदेल की मौत की घोषणा के बाद लोग शोक में डूब गए, हवाना की सड़कें सूनसान हो गईं। लेकिन अमेरिका के मियामी में क्यूबा से भागकर शरण पाए लोग सड़कों पर आ गए और उन्होंने नाचते और अपने बर्तन बजाते हुए खुशी का इजहार किया।
• कहा जाता है कि अमेरिका विरोधी रुख के चलते वहां की खुफिया संस्था सीआइए ने फिदेल को मारने के कई प्रयास किए लेकिन वह हमेशा असफल रही।
• अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन कैनेडी के कार्यकाल की विदेश नीति में क्यूबा संकट की घटना सबसे महत्वपूर्ण ही है। क्यूबा में 1 जनवरी 1959 को डा. फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में साम्यवादी शासन स्थापित हो गया था। जिससे अमेरिका को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा था।
• कास्त्रो ने क्यूबा में बातिस्ता की सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़कर वहां एक समाजवादी व्यवस्था कायम की थी और आम जनता को उनके अधिकार दिलाने में मदद की थी।
• नस्ली भेदभाव को दूर करने में भी उनकी भूमिका अहम रही। कास्त्रो तीसरी दुनिया के देशों के लिए क्रांति के प्रतीक बने और गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भी उन्होंने महत्वूपर्ण भूमिका निभाई।
• कास्त्रो को अमेरिका के नाक नीचे एक सशक्त कम्युनिस्ट देश की नींव रख कर दशकों तक उसे खुली चुनौती देने वाले एक साहसी और क्रांतिकारी नेता के रूप में याद किया जाता है।
• सोवियत रूस से क्यूबा को भरपूर सैनिक व आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई थी जिससे क्यूबा का नवीनीकरण भी हुआ था। यह अमेरिका को सहन नहीं हुआ। राष्ट्रपति कैनेडी ने इस संबंध में 16 सितम्बर 1962 को क्यूबा की जांच के आदेश दिए। फलस्वरूप अमेरिका ने रूस को जिसके जहाज युद्ध सामग्री लेकर क्यूबा की ओर आ रहे थे, उसे 22 अक्टूबर 1962 रोककर क्यूबा की नाकाबंदी कर दी।
• दक्यूबा की इस नाकाबंदी ने अमेरिका को खुली चुनौती दी कि या वह क्यूबा की मदद बंद करे या युद्ध के लिए तैयार रहे।
• इस घटना से विश्वशांति भंग होने का अंदेशा था। इसलिए रूसी राष्ट्रपति ख्रुश्चेव ने विश्वशांति के हित मंे अपने तैनात हथियारों को हटाना ही उचित समझा। इसे कैनेडी काल की सबसे बड़ी विजय मानी गई।

Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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