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Tuesday, November 29, 2016

दैनिक समसामयिकी 28 November 2016(Monday)

1.अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए पैकेज की डोज
• नोटबंदी के बाद कमजोर पड़ी मांग को उठाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए केंद्र एक विशेष पैकेज देने पर विचार कर रहा है। इस पैकेज का स्वरूप कैसा होगा अभी यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन इसके जरिये सार्वजनिक व्यय बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
• सूत्रों के अनुसार, नोटबंदी के फैसले का असर वित्त वर्ष 2016-17 कीतीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों पर पड़ना तय है। नोटबंदी से निजी उपभोग व्यय में कमी आई है और कुछ कंपनियों ने उत्पादन में भी कटौती की घोषणा की है। 

• इन सभी कारकों के चलते तीसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि घटकर छह प्रतिशत से भी नीचे आ सकती है। साथ ही चौथी तिमाही पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है क्योंकि उत्पादन घटने से संगठित और असंगठित क्षेत्र में लगे लोगों की आय पर नोटबंदी के फैसले का नकारात्मक असर पड़ सकता है।
• ऐसी स्थिति में चालू वित्त वर्ष में 7 से 7.5 प्रतिशत विकास दर के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल होगा।
• सूत्रों का कहना है कि अर्थव्यवस्था को नोटबंदी के असर से उबारने तथा कृषि और असंगठित क्षेत्र की स्थिति बेहतर करने खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग बढ़ाने के लिए सरकार स्टिमुलस पैकेज का एलान कर सकती है। इसके तहत सरकार का पूरा जोर सार्वजनिक व्यय बढ़ाने पर होगा।
• उल्लेखनीय है कि सितंबर 2008 की ग्लोबल मंदी की मार से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तत्कालीन संप्रग सरकार ने राजकोषीय पैकेज दिया था।
• उस समय सरकार ने ढांचागत क्षेत्र में व्यय बढ़ाने के लिए न सिर्फ 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त योजनागत आवंटन किया बल्कि सेनवेट की दर में भी कटौती की थी जिससे विभिन्न उत्पाद सस्ते हुए और मांग बढ़ी।
• हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि 500 रुपये और 1000 के पुराने नोट बंद करने के सरकार के फैसले का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
• उनकी दलील है कि नोटबंदी के बाद बैंकों के पास पर्याप्त लिक्विडिटी होगी जिसे वे ढांचागत क्षेत्र, मैन्यूफैक्चरिंग और कृषि क्षेत्र में उधार दे सकेंगे। आने वाले दिनों में ब्याज दरों में भी कमी आने के आसार हैं।
• चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार का बजट 19,78,060 करोड़ रुपये है। सूत्रों का कहना है कि अगले वित्त वर्ष का बजट 22 से 23 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। सरकार निजी उपभोग व्यय को बढ़ाने के साथ-साथ सार्वजनिक व्यय में वृद्धि पर जोर देगी।
• असल में सरकार की पूरी कोशिश सार्वजनिक व्यय बढ़ाने पर है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आम बजट में आवंटित योजनागत राशि में से 58.7 प्रतिशत खर्च हो चुकी है जो एक रिकॉर्ड है। इससे पहले किसी भी वित्त वर्ष में खर्च में इतनी तेजी देखने को नहीं मिली।
2. भारतीयों के स्विस खातों की जानकारी पाने के प्रयास तेज
• विदेशों में जमा काले धन को पकड़ने के अपने प्रयासों को तेज करते हुए भारत ने हाल के महीनों में स्विट्जरलैंड सरकार को ‘‘प्रशासनिक सहयोग’ के लिए 20 अनुरोध भेजे हैं। इनमें कर चोरी करने के लिए स्विस बैंकों का इस्तेमाल करने वाले संदिग्ध भारतीयों की जानकारी मांगी गई है।
• भारत ने जिन व्यक्यिों और कंपनियों की जानकारी मांगी है उनमें कम से कम तीन सूचीबद्ध कंपनियों, एक रीयल एस्टेट कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी, दिल्ली के एक पूर्व नौकरशाह की पत्नी, दुबई में रहने वाले भारतीय मूल के एक निवेश बैंकर, कानून से बच कर भागा एक चर्चित व्यक्ति और उसकी पत्नी, संयुक्त अरब अमीरात स्थित एक होल्डिंग कंपनी और विदेशों में बस चुका और संभवत: ट्रेडिंग करने वाले कुछ गुजराती व्यापारी भी शामिल हैं।
• संदेह है कि इनमें से कई लोगों के विदेशी बैंकों में स्विस बैंकों में खाते हैं जो पनामा और ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड जैसे कर चोरों की पनाहगाह माने जाने वाले क्षेत्रों में पंजीकृत कंपनियों के जारिए परिचालित किए जा रहे हैं। ‘‘प्रशासनिक सहायता’ अनुरोध के तहत जामनकारी मांगने वाला देश कुछ तयों और सबूतों के आधार पर सूचनाओं के लिए अनुरोध करता है।
• इस अनुरोध को स्विट्जरलैंड के कानूनों के अनुसार संघीय गजट में प्रकाशित कराया जाता है ताकि संबंधित व्यक्ति चाहे तो उस पर कोई आपत्ति उठा सके। गौरतलब है कि भातर ने हाल में स्विट्जरलैंड की सरकार के साथ स्विस खातों के बारे में सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान की व्यवस्था का समझौता किया है। इसके तहत सितम्बर 2018 से आगे की अवधि के बारे में सूचनाओं का स्वचालित तरीके से आदान-प्रदान होगा।
• पिछले हफ्ते भारत और स्विट्जरलैंड ने स्वत: जानकारी आदान-प्रदान के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें सितम्बर 2018 के बाद के खातों की जानकारी स्वत: साझा की जाएगी। इसके अलावा बाकी अनुरोधों का निस्तारण मौजूदा द्विपक्षीय कर संधि के माध्यम से होगा।
3. बुनियादी परियोजनाओं की लागत में भारी वृद्धि
• देश में 273 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत में 1.77 लाख करोड़ रपए का इजाफा हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी में विलंब की वजह से इन परियोजनाओं की लागत बढ़ी है।अगस्त, 2016 में सांख्यिकी एवं कार्यक्र म क्रि यान्वयन मंत्रालय ने अगस्त, 2016 में 1,167 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी की।
• ये परियोजनाएं बिजली, रेलवे और सड़क जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं जो 150 करोड़ रपए या उससे अधिक की हैं।मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 1,167 परियोजनाओं में से 282 निर्धारित समयसीमा के हिसाब से आगे बढ़ रही हैं। 337 में देरी हुई है, 273 परियोजनाओं की लागत में इजाफा हुआ और 85 परियोजनाएं ऐसी हैं जो देरी से तो चल ही रही हैं वहीं उनकी लागत में भी बढ़ोतरी हुई है।
• रिपोर्ट में कहा गया है कि 1,167 परियोजनाओं की क्रि यान्वयन की लागत 14,33,476.53 करोड़ रपए है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने की अनुमानित लागत 16,10,504.54 करोड़ रपए पर पहुंच गई। इस तरह इन परियोजनाओं की लागत में 1,77,028.01 करोड़ रपए या 12.35 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
• रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त, 2016 तक इन परियोजनाओं पर खर्च 6,30,581.41 करोड़ रपए हुआ है। यह इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत का 39.15 प्रतिशत है।
• देरी वाली 337 परियोजनाओं में से 68 एक से 12 महीने की देरी से चल रही हैं। 54 परियोजनाओं में 13 से 24 महीने, 138 में 25 से 60 महीने तथा 77 में 61 या अधिक माह की देरी है।
4.किन्नरों के लिए आरक्षण फॉर्म में अलग कॉलम
• भारतीय रेल के 163 साल के इतिहास में पहली बार किन्नरों के लिए आरक्षण फॉर्म में अलग से कॉलम बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार के अनुरोध पर रेलवे को यह निर्देश दिया था।
• रेलवे के आरक्षण फॉर्म में पुरुष व महिला के लिए अलग-अलग कॉलम बने हैं। अगर किन्नर किसी ट्रेन की आरक्षित श्रेणी में सफर करते हैं तो उन्हें इन्हीं दो में एक कॉलम में टिक करना पड़ता है। दशकों से चली आ रही इस व्यवस्था में अब बदलाव किया गया है।
• नए नियम के मुताबिक अब अगर किन्नर आरक्षण फॉर्म भरेंगे तो उन्हें थर्ड जेंडर के कॉलम का विकल्प मिलेगा। महिला किन्नर को टी/एफ और पुरुष किन्नर को टी/एम लिखना होगा। नई व्यवस्था के तहत सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (क्रिस) के सॉफ्टवेयर में बदलाव किया जाएगा।
5. लक्ष्य की ओर अग्रसर ‘‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’
• सुरक्षित गर्भावस्था एवं सुरक्षित प्रसव के माध्यम से जच्चा बच्चा मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान लक्ष्य की प्राप्ति की ओर बढ़ रहा है। अभियान के तहत हर महीने की 9 तारीख को परिवार कल्याण केंद्रों, चिकित्सालयों में गर्भवती महिलाओं के स्वस्य की मुफ्त जांच की जा रही है, जिसकी पांचवी मंथली रिपोर्ट के सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
• गर्भस्थ महिलाएं खुद पहुंच रही हैं केंद्र :राष्ट्रीय स्वास्य मिशन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एसएल वर्मा ने कहा कि अभियान की शुरुआत इस वर्ष 9 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसमें हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं के स्वास्य की मुफ्त जांच व पंजीकरण किया जाता है।
• इस बीच रविवार को अभियान की पांचवीं मंथली रिपोर्ट की समीक्षा पेश की गई जिसके सकारात्मक परिणाम मिले। रिपोर्ट में महिलाएं गर्भ धारण करने के या फिर शिशु पैदा करने की प्लानिंग करने वाली महिलाओं के साथ ही उनके पति व अन्य रिश्तेदार उन्हें उनके स्वास्य का स्टेट्स जानने और टीकाकरण के फायदों के बारे में तकनीकी जानकारियां लेने के लिए खुद आ रहे हैं।
• मसलन इन टीकों को लगवाने से कौन सी बीमारियां से बचा जा सकेगा और इसे लगवाने से जच्चा-बच्चा के जीवन में किस तरह का सुधार होगा। खून की कमी के ज्यादा मामले :अभियान में पाया गया कि महिलाओं में खून की कमी के 60 फीसद मामले दर्ज किए गए।
• इन्हें कैल्शियम व अन्य पौष्टिक तत्वों के सेवन करने के बारे में भी बताया जा रहा है। भा रहा है, जागरूकता का तरीका : खून की कमी, उच्च रक्तचाप, कम वजन, जच्चा-बच्चा दोनों के जीवन के लिए खतरनाक माना जाता है। अभियान के जरिए हम अब गर्भ ठहरने के पहले से तीसरे महीने में इन बीमारियों की आशा वर्कर्स, एएनएम के माध्यम से पहचान कर 70 फीसद के लक्ष्य को पूरा करने के करीब है।
• रक्ताल्पता, उच्च रक्तचाप पीड़ित महिला जब गर्भ धारण करती है तो ऐसी हालत कोख में पलने वाले शिशु की विकास दर असामान्य होने की संभावना भी बनी रहती है। योजना प्रारंभ होने से पहले मुश्किल से 30 से 35 फीसद महिलाएं ही गर्भधारण करने के एक से तीन माह के भीतर हेल्थ सेंटर पहुंचती थी। वे यहां तब आती थी जब गर्भ ठहरने के 4 से 6 माह का समय बीत चुका रहता था, विलंब से आने की वजह से हम अविकसित बेबी को स्वस्थ जीवन देने में कठिनाई महसूस करते थे।
• जागरूकता शुरुआत में ही यदि बीमारी की पहचान कर ली जाए तो मातृ एवं बाल मृत्यु दर के लक्ष्य को शून्य स्तर पर लाया जा सकता है। सुबह से भीड़ थी गर्भवती महिलाओ की : प्राथमिक अस्पताल, नीलोखेड़ी के डिप्टी सीएमओ डा. सतबीर सिंह ने कहा कि महिलाओं के साथ ही उनके परिजनों में भी स्वास्य के प्रति जागरूकता आ रही है।
• 9 जुलाई 2016 में इस केंद्र में 126 गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई जिसमें से 28 हाई रिस्क कैटेगरी में पाई गई। इसी तरह अगस्त माह में 211 गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग में से 44, सितम्बर में 177 में से 42, अक्टूबर में 115 में से 22, और 27 नवम्बर यानी रविवार को 234 में से 67 महिलाएं जोखिम अवस्था में पहचान की गईं।
• इन महिलाओं का डिजिटिकरण पंजीकरण किया गया है। इसमें बच्च के जन्म लेने और एक साल तक दोनों की सेहत पर निगरानी रखी जाएगी। प्रसव पूर्व देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ रही है : यूनिसेफ के बालरोग विशेषज्ञ डा. गगन गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर का यह कार्यक्रम उच्च जोखिम की गर्भावस्था की पहचान एवं रोकथाम करने तथा तकरीबन 3 करोड़ गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क प्रसव पूर्व देखभाल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
• यह देश में जच्चा-बच्चा मृत्यु दर में गिरावट लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। हम उन महिलाओं को लक्षित कर रहे हैं जिन्हें न्यूनतम जांच एवं चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हो पाती जैसे एएनसी जांच और दवाएं जैसे आईएफए एवं कैल्शियम सप्लीमेंन्ट आदि। क्लीनिकों में गर्भवती महिलाओं को ये जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है।
• निदान एवं उपचार के अलावा काउन्सलिंग भी गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है, खासतौर पर उच्च जोखिम के मामलों में। अभियान का उद्देश्य : डिप्टी सीएमओ डा. नीलम वर्मा ने कहा कि ‘‘हालांकि जच्चा-बच्चा मृत्यु दर में कमी लाने के लिए पर्याप्त प्रयास किए हैं।
• प्रोग्राम इस तय पर आधारित है कि अगर भारत में हर गर्भवती महिला की ठीक से जांच की जाए, उसे जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की मौत को रोका जा सकता है।’

Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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