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Thursday, November 17, 2016

भारत की खनिज सम्पदा

भारत में खनिज सम्पदा का विशाल भंडार है, जिससे उद्योगों को, विशेषकर लोहा-उद्योग को कच्चा माल मिलता है । भूगर्भीय सर्वेक्षण विभाग के अनुसार भारत में खनिज सम्पदा वाले 50 क्षेत्र हैं और उन क्षेत्रों में लगभग 400 स्थलों पर खनिज मिलते हैं । भारत में लौह-अयस्क का बहुत विशाल भंडार है । भारत लोहा के अलावे मैंगनीज, क्रोमाईट, टाइटेनियम, मैग्नासाईट, केनाईट, सिलिमनाईट, परमाणु-खजिनों अभ्रक और बाॅक्साइट के मामले में न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि इनका बड़ी मात्रा में निर्यात भी करता है ।

भारत में खनिज सम्पदा का वितरण बहुत असमान है । दामोदर घाटी प्रदेश में पेट्रोलियम को छोड़कर खजिन सम्पदा का सर्वाधिक भंडार है । जबकि मंगलौर से कानपुर की रेखा के पश्चिमी भाग के प्रायद्वीपीय क्षेत्र में खनिज के भंडार बहुत कम हैं । इस रेखा के पूर्व में धात्त्विक खनिज, कोयला, अभ्रक तथा कई गैर-धात्त्विक खनिजों के बड़े भंडार हैं । गुजरात और असम में पेट्रोलियम के समृद्ध भंडार हैं । राजस्थान में कई अधात्त्विक खनिजों के भंडार हैं ।
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नागालैंड और पं. बंगाल में खनिज सम्पदाओं की कमी है । खनिज संपदा से विपन्न अन्य राज्य राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और मेघालय हैं । धात्त्विक एवं अधात्त्विक खनिजों तथा कोयला का अधिकांश उत्पादन बिहार और मध्य प्रदेश में होता है ।
धात्त्विक - खनिज -
ये दो प्रकार के होते हैं:- (1) लौह-अयस्क, मैंगनीज-अयस्क, क्रोमोईट, पाईराईट, आदि लौह धात्त्विक खनिज हैं । भारत इनमें समृद्ध है । (2) अलौह धात्त्विक खनिज में तांबा का अयस्क, बॉक्साइट, ईट, जिंक, शीशा, सोना, चाँदी आदि आते हैं । बॉक्साइट को छोड़कर अन्य अलौह-धात्विक खनिजों में भारत का उत्पादन पर्याप्त नहीं है, जिससे इन खनिजों का आयात करना पड़ता है ।
लोहा -
भारत में लौह-अयस्क का भंडार विश्व में मात्रा एवं गुणवत्ता दोनो आधार पर सर्वोत्कृष्ट है। विश्व के कुल लौह भंडार का 10% भारत में है । भारत में पाये जाने वाले मुख्य लौह-अयस्क हेमाटाईट और मैग्नाटाईट हैं, जिनमें 60-70% तक लोहा मिलता है । इसलिए इनकी बहुत अधिक अंतर्राष्ट्रीय मांग है। देश के लगभग हर राज्य में लौह-अयस्क मिलता है । लेकिन 96% लौह-अयस्क सिंहभूम (बिहार), उड़ीसा के ओनझार, तालचर, बोनई और मयूरभंज में, छत्तीसगढ़ के बैलाडीला में तथा कर्नाटक और गोवा में मिलता है ।
छत्तीसगढ़ के बैलाडीला और राजहरा के खानों से निकाला गया लौह अयस्क विशाखापट्टनम के बंदरगाह से जापान भेजा जाता है । कर्नाटक के दोनईमलाई और कुद्रेमुख के खानों से निकाला गया लौह-अयस्क मंगलोर के बंदरगाह से दूसरे देशों को निर्यात किया जाता है ।
मैंगनीज -
मैंगनीज के अयस्क का भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है । मैंगनीज का इस्तेमाल लोहा-इस्पात एवं लौह-चुंबकीय मिश्र-धातुओं के निर्माण में होता है । मैगनीज के सर्वाधिक भंडार कर्नाटक में है । इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र के नागपुर और भंडारा तथा मध्य प्रदेश के बालाघाट और छिंदवाड़ा में भी इसके भंडार हैं ।
सोना -
भारत में सोना खानों से भी मिलता है और रेत के कणों में भी बिखरे रूप में मिलता है । धारवाड़ के स्तरित चट्टानों वाले क्षेत्र में अधिकांश स्वर्ण-भंडार हैं । प्रतिवर्ष लगभग 10 क्विंटल सोना निकाला जाता है ।भारत में सोने के खान लार और हट्टी (रायचूर जिला) में हैं । ये दोनों खान कर्नाटक राज्य में हैं । कोलार (कर्नाटक) से निकला सोना भारतीय रिजर्व बैंक को बेचा जाता है । विश्व के गरीब देषों में से एक होने के बावजूद विष्व में सोने की सबसे ज्यादा खपत भागर में (विष्व का 26% तथा मात्रा की दृष्टि से लगभग 850 टन प्रतिवर्ष) होती है ।
तांबा -
भारत में तांबा की बहुत कमी है, जिससे तांबा का आयात करना पड़ता है । यह मुख्यतः बिहार के सिंहभूम, मोलाबानी और राखा, मध्यप्रदेश के बालाघाट और राजस्थान के खेतड़ी और अलवर में केन्द्रित है । हर साल लगभग 30-35 लाख टन तांबा निकाला जाता है ।
बॉक्साइट
यह एक एल्युमिनियम अयस्क है । एल्युमिनियम एक हल्की धातु है, जिसका उपयोग वायुयान, विद्युत-उपकरणों तथा दैनिक जीवन संबंधी अन्य वस्तुओं के निर्माण में होता है । भारत में बॉक्साइट का विपुल भंडार है । बॉक्साइट के अयस्क अधिकांशतः लेटेराईट क्षेत्रों में मिलते हैं । यह अधिकांशतः उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश (बालाघाट, जबलपुर) छत्तीसगढ़ (बिलासपुर), गुजरात, महाराष्ट्र (बेलगांव और थाणे) और बिहार (राँची और पलामू) में मिलता है ।
अभ्रक -
अपने कई गुणों के कारण अभ्रक विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक -उद्योग के लिए बहुत आवश्यक खनिज है । यह अच्छा तापरोधी है और इसे आसानी से इच्छानुसार पतले-पतले चादरों में बाँटा जा सकता है ।
भारत अभ्रक का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जो विश्व के कुल अभ्रक उत्पादन का 85% उत्पादित करता है । विष्व में अभ्रक का 60% व्यापार भारत करता है ।अभ्रक के 60% भंडार अकेले बिहार में ही है । इसके अतिरिक्त यह झारखण्ड, आन्ध्रप्रदेष एवं राजस्थान में भी पाया जाता है ।
चूना-पत्थर -
चूना-पत्थर ;(CaCo3) का उपयोग मुख्य रूप से सीमेंट उद्योग में होता है । मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, बिहार, उड़ीसा, राजस्थान और कर्नाटक चूना-पत्थर के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
जिप्सम -
जिप्सम केलषियम का जलयोजित सल्फाइट है । इसका उपयोग मुख्यतः सीमेंट और एल्युमिनियम सल्फेट बनाने में होता है । इसके अलावा इसका उपयोग प्लास्टर आॅफ पेरिस तथा सेरेमिक उद्योग में भी होता है । राजस्थान (जोधपुर और बीकानेर) इसका मुख्य उत्पादक राज्य है । इसके बाद तमिलनाडु का स्थान है ।
नमक -
साधारण नमक; जिसे सोडियम क्लोराईड भी कहते हैं, में 39.32% सोडियम और 60.68% क्लोरीन होता है । इसका 70% उत्पादन रसोई के काम आता है । प्रायद्वीपीय तट के समुद्री जल से, राजस्थान के शुष्क क्षेत्र की नमकीन झीलों (सांभर झील) से तथा गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चट्टानी जमावों से नमक का उत्पादन होता है । तटवर्तीय प्रदेशों; विशेषकर गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय प्रदेशों में नमक का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है ।
परमाणु-खनिज -
यूरेनियम बिहार (जादूगोड़ा), हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ (बस्तर) में मिलता है। थोरियम केरल तथा तमिलनाडु के तटीय बालू में मिलता है । बेरिलियम (परमाणु संयंत्रों के लिए एक अच्छा नियंत्रक) राजस्थान, तमिलनाडु, बिहार, कश्मीर और आन्ध्र प्रदेश में मिलता है ।
हीरा -
भारत में हीरा एकमात्र मध्य प्रदेश के पन्ना क्षेत्र में मिलता है । हीरे के भंडार वाली इस पन्ना-पट्टी में पन्ना, छतरपुर और सतना जिले आते हैं ।

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