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Thursday, November 17, 2016

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC)

=>"अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय"
-->अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाल (ICC):- एक स्थायी न्यायाधिकरण है जिसमें जन-संहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराधों और आक्रमण का अपराध के लिए अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है।
-->आईसीसी का गठन , 1945 के बाद से अंतरराष्ट्रीय कानून का शायद सबसे महत्त्वपूर्ण सुधार रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के दो निकायों को जो व्यक्तियों के साथ होने वाले व्यवहारों पर नज़र रखते हैं ताकत देता है:

1. मानव अधिकार और
2. मानवीय कानून.
=>यह अदालत 1 जुलाई 2002 को अस्तित्व में आया- वह तिथि जब इसकी स्थापना संधि, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की रोम संविधि को लागू किया गया, और यह केवल उस तिथि या उसके बाद के दिनों में किए गए अपराधों पर मुकदमा चला सकती है।
=>"द हेग, नीदरलैंड"
=> अदालत की आधिकारिक बैठक द हेग, नीदरलैंड, में होती है, लेकिन इसकी कार्यवाही कहीं भी हो सकती है।
=>सदस्य :-
114 देश इस न्यायालय के सदस्य हैं। इसके अलावा 34 अन्य देशों ने, जिसमें रूस और अमेरिका भी शामिल हैं हस्ताक्षर तो किए हैं लेकिन रोम संविधि का अनुसमर्थन नहीं किया है।
=>भारत सदस्य नहीं :-
- चीन और भारत समेत ऐसे कई देश हैं जिन्होंने न्यायालय की आलोचना की है और रोम संविधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है।
=>"न्यायाधिकार"
- आमतौर पर आईसीसी अपने न्यायाधिकार का प्रयोग केवल उन्हीं मुकदमों के लिए कर सकता है जहां अभियुक्त, सदस्य देश का नागरिक हो, कथित अपराध सदस्य देश के क्षेत्र में हुआ हो, या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा भेजा गया कोई मामला हो.
- न्यायालय का गठन मौजूदा राष्ट्रीय न्यायिक प्रणाली के पूरक के रूप में किया गया है: यह अपने अधिकार-क्षेत्र का प्रयोग तभी कर सकता है जब राष्ट्रीय अदालत ऐसे मामलों की जांच करने या मुकदमा चलाने में असमर्थ या अनिच्छुक हों.
- जांच और दंड देने के लिए प्राथमिक जिम्मेदारी सदस्य देश पर छोड़ दी जाती है।

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