Email :- vmentorcoaching@gmail.com
Mobile No :- +918290909894, +918824358962
Address :- Near Chandra Mahal Garden, Agra Road Jaipur, 302031, India

Monday, December 05, 2016

दैनिक समसामयिकी 04 December 2016(Sunday)

1.भारत-कतर में पांच करार : वीजा, साइबर सुरक्षा व निवेश के क्षेत्र में हुए समझौते
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत कतर की हाइड्रोकार्बन परियोजनाओं में निवेश करने का इच्छुक है। मोदी ने यहां कतर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुला बिन नासिर बिन खलीफा अल थानी के साथ र्चचा में भारत की यह इच्छा व्यक्त की।
• इस दौरान दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार व सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में पांच समझौतों पर दस्तखत किए।भारत की अपनी पहली यात्रा पर आए अल थानी व मोदी ने रक्षा व सुरक्षा विशेषकर साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर र्चचा की तथा मनी लांड्रिंग और आतंकवाद को वित्तपोषण पर काबू बनाने के लिए संयुक्त कार्रवाई पर सहमति जताई। 

• बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने वीजा, साइबर स्पेस व निवेश के क्षेत्रों में पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए।मोदी ने कहा कि कतर के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा कतर के साथ मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है जिसे भारत हमेशा ही ‘‘मूल्यवान भागीदार’ मानता रहा है।
• पीएम ने कतर के निवेश के लिए भारत के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक अवसरों को रेखांकित किया। ऊर्जा सहयोग पर प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमें क्रेता-विक्रेता के संबंध से आगे बढ़ते हुए संयुक्त उपक्रमों, संयुक्त अनुसंधान व विकास तथा संयुक्त उत्खनन की दिशा में बढ़ना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां कतर के हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में उत्पादन व विपणन परियोजनाओं में निवेश करने को तैयार हैं।
• कतर खाड़ी क्षेत्र में भारत के लिए महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार ही नहीं है बल्कि वह उसके लिए एलएनजी का सबसे बड़ा आपूत्तर्िकर्ता भी है 2015-16 में कुल एलएनजी आयात में उसका हिस्सा 66 प्रतिशत रहा।
• वहीं कतर के प्रधानमंत्री ने भारत को उसके यहां बुनियादी ढांचा व अन्य क्षेत्रों में निवेश करने को आमंत्रित किया। कतर में 2022 में फीफा विश्व कप होना है इसलिए वहां इन क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसर हैं। उन्होंने कतर में बंदरगाह क्षेत्र में भी भारत के निवेश का स्वागत किया।
• स्वरूप ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को और खुला बनाने तथा एफडीआई आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। दोनों नेताओं ने सहयोग बढ़ाने के लिहाज से नागर विमानन को प्राथमिकता वाला क्षेत्र करार दिया।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हर साल 80 लाख टन यूरिया का आयात करता है।
• उन्होंने कहा, ‘‘हम यूरिया आपूत्तर्ि के लिए कतर के साथ दीर्घकालिक समझौते का स्वागत करेंगे।’ उन्होंने यह भी बताया कि भारत खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में कतर की जरूरतों को पूरा कर सकता है।दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात विशेषकर इराक, सीरिया व यमन में ताजा स्थिति पर र्चचा की।
• स्वरूप ने कहा कि राजनयिक, विशेष व आधिकारिक पासपोर्ट धारकों को वीजा छूट के साथ-साथ साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी सहयोग को लेकर समझौता किया गया। व्यापारियों व पर्यटकों को ई वीजा प्रदान करने के लिए समझौते पर बातचीत के बारे में आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
• कुल मिलाकर पांच समझौते हुए। इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने कतर के प्रधानमंत्री से मुलाकात की।

2. ‘‘हार्ट ऑफ एशिया’ में छाया आतंकवाद मसला
• ‘हार्ट आफ एशिया’ सम्मेलन के पहले दिन आतंकवाद विरोधी ढांचे, अफगानिस्तान में स्थायी शांति लाने और युद्धग्रस्त देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के लिए क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे प्रमुखता से छाए रहे। सम्मेलन में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और नियंतण्र ताकतें भाग ले रही हैं।
• इस बीच देर शाम सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनौपचारिक भेंट में हाथ मिलाया और कुशलक्षेम पूछा।अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन में मदद के मकसद से आयोजित इस दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन की शुरुआत इस पवित्र शहर में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मध्य हुई।
• दोनों देश सम्मेलन से इतर किसी द्विपक्षीय संवाद में शामिल होंगे या नहीं, अभी इसको लेकर केवल कयासबाजी ही चल रही है। यूरोपीय संघ, नाटो और शंघाई कोआपरेशन आग्रेनाइजेशन जैसे प्रमुख समूहों के साथ ही इस सम्मेलन में करीब 40 देश भाग ले रहे हैं।
• ‘‘हार्ट ऑफ एशिया इस्तांबुल प्रोसेस’ में अफगानिस्तान के समक्ष पेश विभिन्न चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है जिसमें युद्धग्रस्त देश में शांति प्रक्रिया की बहाली भी शामिल है।
• पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज रविवार को मंत्री स्तरीय सम्मेलन में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करेंगे जिसका उद्घाटन संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी द्वारा किया जाएगा।
• शनिवार को भारत, चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान समेत 14 सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों तथा 17 समर्थक देशों के प्रतिनिधियों ने क्षेत्र के समक्ष मौजूद विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जिनमें पेचीदा सुरक्षा परिदृश्य तथा आतंकवाद, कट्टरपंथ एवं चरमपंथ के खतरों से निपटने के तरीकों पर र्चचा शामिल थी।बैठक में अफगानिस्तान के प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद विरोधी क्षेत्रीय ढांचे के विचार पर बल दिया जिसमें सदस्य देशों पर यह बाध्यकारी प्रतिबद्धता डालने की बात कही गई है कि वे आतंकवादी तंत्र से प्रभावी तरीके से निपटें।
• अफगानिस्तान के प्रतिनिधिमंडल ने स्वर्ण मंदिर और जलियांवाला बाग का भी दौरा किया। सम्मेलन से पूर्व, भारत और अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से पैदा होने वाले आतंकवाद को क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया। दोनों देश रविवार की बैठक में आतंकवाद विरोधी ढांचे को अपनाए जाने पर पूरा जोर लगाने के लिए तैयार हैं।
• बैठक में मंत्री स्तरीय सम्मेलन के मसौदे को अंतिम रूप दिया गया और साथ ही इसके घोषणापत्र पर भी विचार-विमर्श हुआ जिसमें आतंकवाद संबंधी हिस्से पर विशेष ध्यान रहेगा। भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित द्विपक्षीय वार्ता पर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं है। भारत पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि वह सीमा पार से आतंकवाद जारी रहने को पाक के साथ द्विपक्षीय संबंधों में नई सामान्य बात स्वीकार नहीं करेगा।
• साथ ही भारत स्पष्ट कर चुका है कि आतंकवाद जारी रहने के माहौल में वार्ता नहीं हो सकती। सम्मेलन का मुख्य विषय सुरक्षा और समृद्धि है जिसमें पांच देशों की रेल परियोजना, चाबार परियोजना सहित प्रमुख संपर्क पहलों पर विचार-विमर्श होगा। हार्ट ऑफ एशिया इस्तांबुल प्रोसेस को 2011 में शुरू किया गया था।
3. जीएसटी परिषद की बैठक बेनतीजा
• वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने के लिए बनाए गए कानूनों के मसौदों पर जीएसटी परिषद की बैठक में सहमति नहीं बन पाई है। अब अगली बैठक 11 और 12 दिसम्बर को होगी।वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में परिषद की दो दिनों तक चली पांचवीं बैठक बेनतीजा रही।
• बैठक के बाद जेटली ने शनिवार को यहां पत्रकारों से कहा कि परिषद की अगली बैठक 11 और 12 दिसम्बर को होगी जिसमें कानूनों के मसौदे को अंतिम रूप दिए जाने की पूरी संभावना है। इस दो दिवसीय बैठक में भी इन मसौदों पर र्चचा हुई है लेकिन राज्यों को कुछ और वक्त की दरकार है।
• उन्होंने कहा कि करदाताओं पर दोहरे नियंतण्र के मुद्दे पर भी कोई निर्णय नहीं हो पाया है और इस पर भी अगली बैठक में र्चचा होगी। इसके साथ ही उस बैठक में राज्यों को क्षतिपूर्ति और जीएसटी से जुड़े कानूनों के मसौदों पर भी र्चचा होगी। उन्होंने कहा कि कुछ गंभीर मुद्दों पर सुझाव मिले हैं जिन पर विचार किया जाएगा।
• जीएसटी कानूनों के मसौदे पर एक राय नहीं बनने के मुद्दे पर मत विभाजन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि शुरुआत से अब तक कड़ी मशक्त के बाद जीएसटी को लेकर पूरी तरह से आम सहमति बनी और अब इस तरह के विवादों में पड़ने तथा इसमें दलगत राजनीति को लाने की जरूरत नहीं है।
क्या हुआ बैठक में
• सीजीएसटी व एसजीएसटी व आइजीएसटी पर चर्चा
• करदाताओं पर प्रशासनिक नियंत्रण के विकल्पों पर गौर
• राज्यों को क्षतिपूर्ति बिल पर चर्चा नहीं हुई
दोहरे नियंत्रण पर सुझाव
• हॉरिजेंटल : इसमें करदाताओं के कारोबार के आधार पर विभाजन
• वर्टिकल : केंद्र व राज्यों के बीच सभी करदाताओं का विभाजन
• हाईब्रिड : विभाजन का मॉडल अभी अस्पष्ट
4. आधार’ आधारित लेनदेन का तंत्र तैयार करें बैंक : आरबीआइ ने जून तक नई तकनीक लाने का निर्देश दिया
• नकदी के बजाय कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के इरादे से सरकार के साथ-साथ भारतीय रिजर्व बैंक भी उपाय करने में जुट गया है। आरबीआइ ने सभी बैंकों से कहा है कि वे 30 जून 2017 तक अपने सभी एटीएम, कार्ड स्वाइप मशीन यानी प्वाइंट ऑफ सर्विस (पीओएस) और दूसरी डिवाइसों में तकनीकी बदलाव करें ताकि कार्डधारकों की पहचान ‘आधार’ के बायोमेटिक डिटेल (अंगूठे के निशान) से हो सके।
• आरबीआइ ने इस दिशा में बैंकांे की सुस्ती को देखते हुए यह निर्देश दिया है।
• आरबीआइ ने बैंकांे से इस साल 29 सितंबर को इस संबंध में निर्देश जारी कर यह सुनिश्चित करने को कहा था कि कार्ड के जरिये भुगतान और दूसरे लेनदेन में इस्तेमाल होने वाले एटीएम, पीओएस और दूसरे डिवाइस को ऐसा बनाया जाए कि आधार नंबर और बॉयोमेटिक डिटेल के जरिये उससे लेनदेन हो सके।
• आरबीआइ ने यह काम एक जनवरी 2017 से शुरू करने को कहा था हालांकि इस दिशा में बैंकांे की धीमी प्रगति को देखते हुए नई समय सीमा तय की है।
• सूत्रों ने कहा कि फिलहाल आधार के बायोमेटिक तकनीक वाले एटीएम, पीओएस और दूसरे डिवाइसों की आपूर्ति मांग के मुकाबले कम है। यही वजह है कि बैंक इस तरह की नई एटीएम व डिवाइस नहीं खरीद पाए हैं।
• बैंकों को यह भी कहा गया है कि वे इस तरह की नई डिवाइस खरीदने के साथ ही मौजूदा एटीएम, पीओएस और डिवाइसों में भी तकनीकी बदलाव कर लें। हालांकि इसकी समय सीमा फिलहाल नहीं बतायी गयी है।
• उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को नोटबंदी का एलान किया था।
• उन्होंने इस फैसले की वजह काले धन और आतंकी फंडिंग बतायी थी। पुराने नोट बंद होने के बाद बैंकांे में नकदी की किल्लत के मद्देनजर सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने को कई कदम उठाए हैं।
• इसी दिशा में दो दिन पहले ही यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भी घोषणा की है कि आने वाले दिनों में ‘आधार’ के माध्यम से ही लेनदेन किए जा सकेंगे।
5. नोटबंदी के बाद रायों की ऋण सीमा बढ़ाने की मांग
• बहुप्रतीक्षित वस्तु एवं सेवा कर पर विचार के लिए बुलायी गयी जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी से जुड़े लंबित विषयों का समाधान तो नहीं निकला लेकिन राज्यों ने इस अवसर का फायदा उठाते हुए नोटबंदी का मुद्दा उठा दिया।
• राज्यों के वित्त मंत्रियों ने काउंसिल की बैठक से अलग वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ नोटबंदी और इसके राजस्व व विकास दर संभावित प्रभावों के बारे में चर्चा की। कई राज्यों ने नोटबंदी के मद्देनजर उनके राजस्व में गिरावट की आशंका जताते हुए उन्हें बाजार से अधिक उधार उठाने की सुविधा देने के लिए एफआरबीएम कानून में ढील देने की मांग की।
• एफआरबीएम एक्ट यानी राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजटीय प्रबंधन कानून के मुताबिक राज्य सरकारें केंद्र की अनुमति के बगैर ऋण नहीं ले सकती हैं। चौदहवें वित्त आयोग ने फिलहाल केंद्र और राज्यों के लिए राजकोषीय घाटे की सीमा उनके सकल घरेलू उत्पाद के तीन-तीन फीसद के बराबर तय की है।
• इसका मतलब है कि कोई भी राज्य एफआरबीएम की बाध्यता के चलते केंद्र की अनुमति के बिना अपने जीएसडीपी के तीन प्रतिशत से अधिक राशि उधार नहीं ले सकता।
• वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में नोटबंदी पर चर्चा नहीं हो सकती थी, इसलिए उन्होंने अधिकारियों को बैठक से बाहर कर राज्यों के वित्त मंत्रियों से इस संबंध में चर्चा की।
• अधिकांश राज्यों के वित्त मंत्रियों ने सत्ताधारी पार्टी के नजरिये के अनुसार ही बैठक में इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की। कुछ रायों ने एफआरबीएम के तहत अधिक राशि उधार लेने तथा वेज एंड मींस की व्यवस्था को उदार बनाने का सुझाव दिया।
• जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्र ने संवाददाताओं से कहा कि 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद होने से केंद्र के साथ-साथ राज्यों के राजस्व और जीडीपी की वृद्धि दर पर तीसरी और चौथी तिमाही में असर पड़ेगा।
• इसलिए राज्यों को यह चिंता है कि जो वादे उन्होंने सामाजिक क्षेत्र और ढांचागत क्षेत्र के संबंध में अपने बजट में किए हैं, उन्हें कैसे पूरा किया जाए। इसके लिए धनराशि की आवश्यकता होगी।
6. ताइवान से ट्रंप की सीधी बात, चिढ़ा चीन
• दशकों पुरानी राजनयिक नीति को तोड़ते हुए अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान की राष्ट्रपति साइ इंग वेन से बात की। शुक्रवार को टेलीफोन पर हुई 10 मिनट की बातचीत में दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश नीति में बड़े बदलाव का संकेत देने वाले इस कदम पर चीन ने नाराजगी जताई है।
• बीजिंग ने ट्रंप की सीधी आलोचना से बचते हुए इसे ताइवान की घटिया चाल करार दिया है। विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि इस फोन कॉल के बावजूद न तो ‘एक चीन की नीति’ में कोई बदलाव होगा और न ही चीन-अमेरिका के संबंध खराब होंगे।
• माना जा रहा है कि ऐसा बयान देकर चीन घटनाक्रम के महत्व को कम करने की कोशिश कर रहा है।
• क्या हुई बात : ट्रंप और साइ की बातचीत कार्यकाल संभालने से पहले एशियाई देशों के नेताओं के साथ फोन पर नवनिर्वाचित राष्ट्रपति की बातचीत की श्रृंखला का हिस्सा है।
• ट्रंप की सत्ता हस्तांतरण टीम ने कहा है कि साइ ने चुनाव में जीत पर ट्रंप को बधाई दी। दोनों ने अमेरिका और ताइवान के बीच करीबी आर्थिक, राजनैतिक और सुरक्षा संबंधों के बारे में भी बात की।
• 37 साल बाद : दुनिया के यादातर देशों की तरह अमेरिका भी ‘एक चीन की नीति’ का पालन करता है। ताइवान और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच आखिरी बार बात 1979 में हुई थी। उस समय जिमी कार्टर ने अपने ताइवानी समकक्ष से बात की थी।
• इसके बाद से दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर संवाद नहीं हुआ। हालांकि इस साल की शुरुआत में निवर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चीन की आपत्तियों को नजरंदाज करते हुए ताइवान को भारी मात्र में हथियार बेचने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी।
• चीन क्यों नाराज : चीन ताइवान को स्वतंत्र देश न मानकर अपना हिस्सा मानता है। हालांकि 1949 में चीनी गृहयुद्ध के बाद से ताइवान की अपनी सरकार है। लेकिन, चीन का मानना है कि एक दिन ताइवान को उसके ही साथ मिलना है।
• यही कारण है कि ताइवान से सीधे तौर पर कूटनीतिक संबंध बनाने के प्रयासों का वह विरोध करता है।
कूटनीति को प्रभावित करने वाले फोन कॉल
• प्रसिद्ध अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा है कि उनका लापरवाह तरीके से विदेशी नेताओं को फोन कॉल करना दशकों से चले आ रहे कूटनीतिक चलन को प्रभावित कर सकता है।
• अखबार ने कहा है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन करना भारत-पाक संबंधों के ‘नाजुक संतुलन’ को प्रभावित कर सकता है। तीस नवंबर को ट्रंप और शरीफ की बातचीत हुई थी। बातचीत को लेकर जो ब्यौरे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के कार्यालय ने जारी किए थे उस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
• न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा है कि यदि ट्रंप ध्यान दें तो उन्हें पता चलेगा कि वह भारत को दरकिनार करने का खतरा उठा रहे हैं जो पाकिस्तान को एक बड़े खलनायक के तौर पर देखता है। साथ ही लग रहा है कि वह पाक के व्यवहार को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
• अखबार ने ताइवानी राष्ट्रपति साइ इंग वेन के साथ बातचीत पर भी सवाल उठाए हैं। कूटनीतिक चलन को दरकिनार करने वाला यह कदम ट्रंप के कार्यभार संभालने से पहले चीन के साथ संबंधों में तेजी से दरार ला सकता है।
• वाशिंगटन पोस्ट ने ट्रंप के इस कदम को राजनयिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन और चीन के साथ रिश्तों में जटिलता पैदा करने वाला बताया है।
• सीएनएन ने कहा है कि यह टेलीफोन कॉल निश्चित तौर पर चीन को आक्रोशित करने वाला है। लगता है कि ट्रंप ने दुनिया के सभी देशों से अमेरिका के अप्रत्याशित रिश्तों में बदलाव लाने का संकल्प ले रखा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी ट्रंप-शरीफ की बातचीत के ब्यौरे को कूटनीतिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया है।
• न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा है कि ट्रंप ने फिलीपींस के राष्ट्रपति रोडिगो दुर्तेते को अमेरिकी दौरे के लिए आमंत्रित किया है। दुर्तेते पर मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के आरोप हैं। उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था।
• चीन यात्र के दौरान अपने देश को अमेरिका से दूर करने की घोषणा की थी। इसके बावजूद दुर्तेते को न्योता देना बताता है कि अमेरिका को उनके व्यवहार से कोई फर्क नहीं पड़ता।
Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

No comments:

Post a Comment