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Thursday, December 08, 2016

दैनिक समसामयिकी 08 December 2016(Thursday)

1.मौद्रिक समीक्षा नीति : रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को यथावत रख चौंकाया
• सरकार, उद्योग जगत, बाजार और जनता की उम्मीदों को धता बताते हुए रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने ब्याज दरों में कटौती का रास्ता साफ करने से इन्कार कर दिया है।
• चालू वित्त वर्ष में मौद्रिक नीति की पांचवीं दोमाही समीक्षा करते हुए आरबीआइ गवर्नर उर्जित पटेल ने रेपो रेट को 6.25 फीसद पर ही बनाए रखने का एलान किया है।
• उनका यह चौंकाने वाला फैसला नोटबंदी की मार से हलकान अर्थव्यवस्था की रफ्तार को और सुस्त करने वाला साबित हो सकता है।

• खास बात यह है कि केंद्रीय बैंक ने खुद ही चालू वित्त वर्ष की आर्थिक विकास दर के अनुमान 7.6 फीसद से घटाकर 7.1 फीसद कर दिया है।
• इसमें कमी के लिए उसने नोटबंदी को ही अहम वजह बताया है। लेकिन महंगाई में तेज वृद्धि की आशंका से आरबीआइ ने ब्याज दरों को लेकर कड़ा रवैया अख्तियार किया है।
• बैंक की इस घोषणा के बाद बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स भी डेढ़ सौ अंक से ज्यादा नीचे आकर बंद हुआ।
• आरबीआइ गवर्नर बनने के बाद पटेल की यह दूसरी और नोटबंदी के बाद पहली मौद्रिक नीति समीक्षा थी। बीते तीन माह में अर्थव्यवस्था में सुधार का ठोस संकेत नहीं मिलने और साथ ही नोटबंदी से कई उद्योगों में मांग में भारी कमी की आशंका को देखते हुए सभी मानकर चल रहे थे कि रेपो रेट में 0.50 फीसद की कमी होगी।
• ऐसा लगता है कि छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को महंगाई थामने की यादा जरूरत महसूस हो रही है। महंगाई दर फिलहाल काफी हद तक काबू में है। लेकिन आरबीआइ का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कचे तेल की कीमतों, 7वें वेतन आयोग के कारण लोगों के हाथ में आए पैसे की वजह से महंगाई दर आने वाले महीनों में बढ़ सकती है।
• केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में महंगाई की दर के पांच फीसद या इससे यादा रहने की बात कही है।
• सबसे ताज्जुब की बात यह है कि गवर्नर ने स्वयं यह माना है कि नोटबंदी से कई तरह की औद्योगिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। खासतौर पर खुदरा कारोबार, होटल, रेस्तरां, पर्यटन व कई असंगठित क्षेत्र से जुड़े उद्योगों पर इसका खराब असर पड़ेगा।
• इसके बावजूद उन्होंने ब्याज दरों में कोई राहत नहीं दी है। इसके पीछे एक वजह यह मानी जा रही है कि अभी ब्याज दरों को घटाने से बहुत फायदा नहीं होगा।
• बैंकों के पास तरलता (फंड) का कोई अभाव नहीं है और दूसरा मांग की भी बेहद कमी है। बहरहाल, वित्त मंत्रलय ने आरबीआइ के फैसले को साहसिक कदम बताया है।
• आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा है कि ग्लोबल स्तर पर काफी अनिश्चितता है। महंगाई बढ़ने के आसार हैं। इस पर लगाम लगाना मुश्किल है।
• ऐसे में आरबीआइ का कदम सही है। अगर यहां अभी अनिश्चितता रहती तो विदेशी निवेशकों को यह अच्छा संकेत नहीं होता।

2. लोकपाल बिल में संशोधन पर संसदीय समिति की रिपोर्ट पेश करें
• सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से लोकपाल बिल में संशोधन की सिफारिश करने वाली संसदीय समिति की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इससे पता चलेगा कि नेता विपक्ष की जगह लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को जांच समिति में शामिल करने के अलावा रिपोर्ट में और कौन-कौन से संशोधनों के सुझाव दिए गए हैं।
• मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 14 दिसंबर तय की है।
• बुधवार को लोकपाल नियुक्ति के मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि उन्होंने कोर्ट की नाराजगी और चिंता से सरकार के उच्च पदस्थ जिम्मेदार लोगों को अवगत कराया है। संसदीय समिति ने लोकपाल बिल में संशोधन पर रिपोर्ट सौंपी है, जो सरकार के पास विचाराधीन है।
• कोर्ट ने कहा कि अगर सिर्फ नेता विपक्ष की बात है तो इसका हल कोर्ट अपने आदेश से ही निकाल सकता है। इस पर रोहतगी बोले, बाकी सिफारिशें तो तकनीकी हैं, लेकिन फिर भी वह रिपोर्ट पेश करेंगे, ताकि पता चल सके कि किन-किन चीजों में संशोधन की बात कही गई है।
• उधर याचिकाकर्ता संस्था कॉमन कॉज की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने कहा कि बिल में एक मात्र महत्वपूर्ण संशोधन सिर्फ नेता विपक्ष के बारे में ही होना है। 1977 का एक्ट पहले से मौजूद है। इसमें नेता विपक्ष को परिभाषित किया गया है।
• उसके मुताबिक, लोकसभा में सबसे बड़े दल के नेता को ही नेता विपक्ष माना जाएगा। हालांकि सरकार पहले स्पीकर के स्टेटमेंट पर अड़ी है जिसमें लोकसभा की कुल संख्या के दस फीसद सदस्यों वाले दल को नेता विपक्ष का दर्जा देने की बात कही गई है।
• भूषण ने कहा कि सीबीआइ और सीवीसी की नियुक्ति भी बहुत महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने उस मामले मंर आदेश दिये थे। वैसा ही इसमें दिया जाए, क्योंकि बहुत संघर्ष के बाद लोकपाल कानून बना है।
• लोकपाल कानून बने तीन साल बीत चुके हैं ऐसे में कानून लागू न होने के लिए किसे जिम्मेदार माना जाए। न्यायपालिका की भी जिम्मेदारी है कि जो कानून बना है उसे लागू कराए। 1977 के कानून के मुताबिक, नेता विपक्ष को परिभाषित किया जाए।
• हालांकि रोहतगी ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, वह कानून इस मामले मे लागू नहीं हो सकता क्योकि उसमें यह भी कहा गया है कि नेता विपक्ष को लोकसभा अध्यक्ष मान्यता देगा।
3. रिसोर्ससैट-2ए का सफल परीक्षण
• भारत ने अपने नवीनतम रिमोट सेंसिंग उपग्रह ‘‘रिसोर्ससैट-2ए’ का बुधवार को सफल परीक्षण किया। फसल क्षेत्र एवं उत्पादन अनुमान, सूखे की स्थिति की निगरानी, मिट्टी की गुणवत्ता के निरीक्षण, फसल उत्पादन पण्राली के विश्लेषण और कृषि परामर्श जैसे उद्देश्यों के लिए इस उपग्रह का इस्तेमाल किया जाएगा।
• एक त्रुटिरहित मिशन में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी36 ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर उपग्रह का प्रक्षेपण किया और 17 मिनट 05 सेकंड की उड़ान के बाद इसे कक्षा में प्रवेश कराया।
• इसरो के अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने कहा, ‘‘यह एक सटीक प्रक्षेपण रहा।’ संचालन से जुड़ी अपनी अंतिम अवस्था में लाए जाने के बाद उपग्रह अपने तीन कैमरों से तस्वीरें मुहैया कराना शुरू करेगा और आंकड़ों का इस्तेमाल कृषि उद्देश्यों के लिए किया जाएगा ।
• रिसोर्ससैट-2ए का उद्देश्य संसाधनों का निरीक्षण है और यह 2003 एवं 2011 में प्रक्षेपित रिसोर्ससैट-1 और रिसोर्ससैट-2 के अभियान की अगली कड़ी है। यह रिसोर्ससैट-1 और रिसोर्ससैट-2 द्वारा नियंतण्र प्रयोगकर्ताओं को उपलब्ध कराई जाने वाली रिमोट सेंसिंग डेटा सेवाओं को जारी रखेगा। इसरो के अध्यक्ष कुमार ने कहा कि यह ‘‘हमारे तीन चरण वाले इमेजिंग डाटा’ की निरंतरता बनाए रखेगा, जो कि जमीन और पानी से जुड़े विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए बेहद उपयोगी होगा।’
• उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस शानदार काम के लिए तथा एक और सक्रि य उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने के लिए इसरो के पूरे दल को बधाई देना चाहता हूं।’ इसरो ने कहा कि 1235 किलोग्राम के रिसोर्ससैट-2ए को 817 किलोमीटर पर स्थित ध्रुवीय सौर समकालिक कक्षा (एसएसओ) में स्थापित किया गया है। इस उड़ान में, पीएसएलवी के ‘‘एक्सएल’ प्रारूप का इस्तेमाल किया गया।
• रिसोर्ससैट-2ए अपने साथ तीन पेलोड ले गया, जो रिसोर्ससैट-1 और रिसोर्ससैट-2 के साथ भेजे गए पेलोड के समान थे। इसरो ने कहा कि इनमें उच्च विभेदन क्षमता वाला ‘‘लीनियर इमेजिंग सेल्फ स्कैनर’ कैमरा, मध्यम विभेदन क्षमता वाला एलआईएसएस-3 कैमरा और ‘‘एडवांस्ड वाइड फील्ड सेंसर’ कैमरा शामिल था । रिसोर्ससैट-2ए अपने साथ दो ‘‘सॉलिड स्टेट रिकॉर्डर’ भी ले गया है।
• प्रत्येक रिकॉर्डर अपने कैमरों द्वारा ली गई 200 गीगा बाइट्स की तस्वीरें संग्रहित करने की क्षमता रखता है। इन्हें बाद में जमीन पर स्थित स्टेशनों में देखा जा सकता है।
• रिसोर्ससैट-2ए के मिशन की अवधि पांच साल है। पहले इस उपग्रह को 28 नवंबर को प्रक्षेपित किया जाना था । इसरो का प्रमुख उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी अब तक 36 सफल प्रक्षेपण कर चुका है।
4. सबसे बड़ी रिफाइनरी बनाने के लिए करार
• इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन (बीपीसीएल) तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन (एचपीसीएल) ने पश्चिमी तट पर 30 अरब डालर की लागत से देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी की स्थापना के लिए करार पर दस्तखत किए हैं।
• अधिकारियों ने बताया कि तीनों कंपनियों ने महाराष्ट्र में 6 करोड़ टन सालाना की रिफाइनरी के लिए करार किया है। इस गठजोड़ में आईओसी प्रमुख कंपनी होगी। परियोजना में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी आईओसी के पास रहेगी। शेष 25-25 प्रतिशत हिस्सेदारी बीपीसीएल तथा एचपीसीएल के पास होगी। यहां पेट्रोटेक सम्मेलन के मौके पर इस करार पर दस्तखत किए गए।
• पेट्रोलियम मंत्री धम्रेंद्र प्रधान ने बताया कि पेट्रोलियम क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सऊदी अरब की सऊदी अरामको ने परियोजना में हिस्सेदारी लेने में रुचि दिखाई है, पर अभी तक कुछ तय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा कई अन्य कंपनियों की परियोजना में रुचि है। देखते हैं बातचीत कहां तक पहुंचती है।’
• परियोजना के तहत 6 करोड़ टन सालाना की रिफाइनरी तथा विशाल पेट्रोरसायन परिसर का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण की क्षमता एरोमैटिक परिसर, नाफ्था क्रैकर इकाई तथा पॉलिमर परिसर के साथ चार करोड़ टन की होगी। इसकी लागत 1.2 से 1.5 लाख करोड़ रपए बैठेगी।
• भूमि अधिग्रहण की तारीख से परियोजना के निर्माण में 5-6 साल लगेंगे। इस विशाल परिसर के लिए 12,000 से 15,000 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। इसके लिए महाराष्ट्र तट पर दो-तीन स्थानों को लेकर संभावना तलाशी जा रही है। दूसरे चरण में दो करोड़ टन की रिफाइनरी स्थापित की जाएगी।
5. कपड़ा क्षेत्र में सुधारों को मंजूरी
• सरकार ने यादा से ज्यादा नौकरियां पैदा करने और निर्यात बढ़ाने के मकसद से टेक्सटाइल क्षेत्र में सुधारों को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला किया गया। अपैरल मेड-अप सेक्टर में सुधारों के चलते अगले तीन साल में प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर 11 लाख लोगों को नौकरियां मिलेंगी।
• टेक्सटाइल क्षेत्र के इन सुधारों में विस्तारित तकनीकी उन्नयन फंड स्कीम (टफ्स) के जरिये मेड-अप्स को 10 फीसद की अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा प्रधानमंत्री परिधान रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत सरकार इन नए उद्यमों लिए नियोक्ता के हिस्से के 8.33 फीसद के अतिरिक्त ईपीएफ में 3.67 फीसद का योगदान करेगी।
• इन उद्यमों के कर्मचारियों को उनकी भविष्य निधि के रूप में यह लाभ मिलेगा। रायों के शुल्कों से छूट (आरओएसएल) को भी विस्तार दिया गया है। टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए श्रम कानूनों को भी आसान बनाया गया है।
• फर्टिलाइजर सब्सिडी दर यथावत : इसी दिन हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक हुई। इसमें चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए फास्फेट और पोटाश वाले उर्वरकों के लिए सब्सिडी दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया। फिलहाल सरकार फास्फोरस पर 13.24 रुपये और पोटाश पर 15.47 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी दे रही है।
• बैठक में यह भी निर्णय किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आने वाली गिरावट का फायदा फर्टिलाइजर कंपनियों को किसानों को देना होगा।
• इसके लिए उन्हें खाद की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) को घटाना होगा। आमतौर पर सरकार फास्फेट और पोटाश वाले उर्वरकों पर सब्सिडी की दर सालाना आधार पर तय करती है।
6. मिस्र की यूनिवर्सिटी में भारत का उत्कृष्टता केंद्र
• भारत मिस्र के सबसे पुराने एवं प्रतिष्ठित अल-अजहर विविद्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी का उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगा। इस केंद्र की स्थापना दोनों देशों के बीच शिक्षा में सहयोग को बढ़ाने के प्रयास के तहत की जाएगी।
• काहिरा में भारत के राजदूत संजय भट्टाचार्य ने कहा है कि इस केंद्र की स्थापना अगले साल की शुरुआत में विविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग में की जाएगी। भारत और अल-अजहर विविद्यालय के बीच विभिन्न मुद्दों पर सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर र्चचा के लिए भट्टाचार्य ने अल-अजहर के ग्रैंड शेख अहमद अल-तैयब से सोमवार को बात की।
• भट्टाचार्य ने कहा, भारत के प्रमुख कंप्यूटर आईटी संगठनों में से एक ‘‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग’ (सी-डैक) का एक दल इस साल की शुरुआत में मिस्र आया था और उन्होंने केंद्र की स्थापना पर र्चचा के लिए अल-अजहर विविद्यालय के आईटी विभाग और इंजीनियरिंग विभाग के लोगों के साथ मुलाकात की।
• भट्टाचार्य ने बताया, इस परियोजना का पूरा खर्च भारत सरकार उठाएगी। उन्होंने यह भी कहा, उन्होंने अल-तैयब के साथ नरमपंथी इस्लाम के प्रसार में अल-अजहर की भूमिका पर भी र्चचा की।
7. ट्रंप ‘‘टाइम पर्सन ऑफ द ईयर’
• अमेरिका में हिलेरी क्लिंटन को मात देकर राष्ट्रपति निर्वाचित होने वाले डोनाल्ड ट्रंप को टाइम पत्रिका ने ‘‘पर्सन ऑफ द ईयर-2016’ चुना और उनको ‘‘डिवाइडेट स्टेट्स ऑफ अमेरिका’ (विभाजित राज्य अमेरिका) का राष्ट्रपति करार दिया।
• पर्सन ऑफ द ईयर चुने जाने के बाद अब ट्रंप पत्रिका के मुख्य पृष्ठ पर नजर आएंगे जिसका उप-शीर्षक ‘‘प्रेसीडेंट ऑफ डिवाइडेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका’ होगा। इस खिताब के लिए उन्हें विश्व नेताओं, कलाकारों, कारपोरेट क्षेत्र के दिग्गजों और कुछ खास करने वाले संगठनों के बीच से चुना गया है जिनका इस साल की घटनाओं पर अच्छा या बुरा विशेष प्रभाव रहा।
• टाइम पत्रिका की ओर से टाइम पर्सन ऑफ ई ईयर नामित होने के कुछ देर बाद ट्रंप ने एनबीसी न्यूज के कार्यक्र म ‘‘टुडे’ में कहा, यह बड़े सम्मान की बात है।
• ‘‘प्रेसीडेंट ऑफ डिवाइडेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका’ वाले उप शीर्षक के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, मैंने अमेरिका को नहीं बांटा है। हम अमेरिका को फिर से एकजुट करने जा रहे हैं। हम अपनी सेना को मजबूत बनाने जा रहे है और हम आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहे हैं।
• पत्रिका ने कहा, व्यवस्था विरोधी व लोकलुभावनवादी के तौर पर प्रचार करने के बाद 70 साल के ट्रंप अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति चुने गये और उनके निर्वाचन के साथ उस प्रचार अभियान का अंत हुआ जिसमें बार बार राजनीतिक परिपाटी भंग हुई।
• टाइम पर्सन आफ द ईयर की दौड़ में दूसरा स्थान हिलेरी क्लिंटन को मिला है जो राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेट उम्मीदवार थीं। तीसरे स्थान पर ऑनलाइन हैकर्स रहे हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टाइम के संपादकों ने इस सम्मान के आखिरी दावेदारों के तौर पर 11 लोगों में चुना था।
• पत्रिका के ऑनलाइन सव्रेक्षण में मोदी विजेता बने थे। इस सव्रेक्षण में उन्होंने दूसरी बार जीत हासिल की है। टाइम पर्सन ऑफ इ ईयर के दावेदारों में इस बार मोदी एवं ट्रंप के अलावा पुतिन, फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और गायिका बेयोंस शामिल हैं। पिछले साल जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल को टाइम पर्सन ऑफ द ईयर चुना गया था।
Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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