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Sunday, December 11, 2016

दैनिक समसामयिकी 09 December 2016(Friday)


1.तीन तलाक पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी : पर्सनल लॉ संविधान के ऊपर नहीं हो सकता
• इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि टिपल तलाक (तीन तलाक) मुस्लिम महिलाओं के साथ क्रूरता है। यह समाज व देश के हित में नहीं है। यह महिलाओं को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के खिलाफ है। भारत को एक राष्ट्र बनाने में बाधक है।
• न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने यह तल्ख टिप्पणी बुलंदशहर की हिना और उमर बी की अलग-अलग याचिकाओं पर की है।
• कोर्ट ने हिना की याचिका खारिज कर दी और उमर बी को पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने की दी छूट देते हुए याचिका निस्तारित कर दी। इसमें उन्होंने दूसरी शादी करने पर परिवार वालों द्वारा परेशान करने से रोकने की मांग की थी। 

• कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक मुद्दे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। इसलिए वह निकाह या तलाक की वैधता पर कोई फैसला नहीं दे रहे। कोर्ट ने कहा है कि पवित्र कुरान ‘तलाक’ या ‘खुला’ की छूट देता है, लेकिन पति-पत्नी के बीच सुलह के सारे प्रयास विफल होने की दशा में ही इसकी अनुमति दी गयी है।
• लोग अपनी सुविधा के लिए तीन तलाक के इस्लामिक कानून की व्याख्या कर उसे जायज ठहरा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्सनल लॉ संविधान प्रदत्त अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकता। एक 53 साल के पुरुष ने 23 साल की याची से दो बचों की मां (पत्नी) को तलाक देकर निकाह कर लिया।
• जब परिवार व अन्य लोग परेशान करने लगे तो हाई कोर्ट में सुरक्षा की गुहार लगाई। कोर्ट ने अपनी आयु से आधी उम्र की लड़की से निकाह के लिए पत्नी को तलाक देने के कारण याचिका पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर याचिका खारिज कर दी।
• कोर्ट ने कहा कि कुरान में भी तलाक को अछा नहीं माना गया है। बिना किसी ठोस वजह के तलाक धार्मिक या कानून की निगाह में सही नहीं माना जाता। कई देशों में तलाक के लिए कोर्ट को अलग होने के कारणों से संतुष्ट करना पड़ता है, किंतु भारत में ऐसा नहीं है।

2. भगवान के लिए काम करें, चलने दें संसद : राष्ट्रपति
• बाधा पैदा करने का मतलब है कि आप बहुमत की आवाज दबा रहे हैं । अल्पमत सदन के बीचोंबीच आता है, नारेबाजी करता है, कार्यवाहियां रोकता है। ऐसे हालात पैदा करता है कि अध्यक्ष के पास कार्यवाही स्थगित करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता।’
• ‘‘बाधाएं पैदा कर इस तरह की आजादी का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र में ‘‘तीन डी’ यानी ‘‘डिबेट’ (वाद-विवाद), ‘‘डिसेंशन’ (असहमति) और ‘‘डिसीजन’ (निर्णय) अहम होते हैं। लेकिन इसमें चौथा डी नहीं होता। मेरे शिक्षक ने मुझे नहीं बताया कि एक चौथा डी ‘‘डिसरप्शन’ (बाधा) भी होता है।’
• संसद में जारी गतिरोध के मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सदन धरना-प्रदर्शन और ऐसी बाधा पैदा करने की जगह नहीं है जिसमें अल्पमत द्वारा ‘‘बहुमत की आवाज दबा दी जाए।’
• प्रणब ने सांसदों को बताया कि विपक्ष का काम सदन को बाधित करना नहीं, बल्कि र्चचा और कामकाज करना है। रक्षा संपदा दिवस व्याख्यान के अवसर पर यहां, ‘‘मजबूत लोकतंत्र के लिए चुनाव सुधार’ विषय पर अपने संबोधन में प्रणब ने कहा, ‘‘संसदीय पण्राली में कामकाज में बाधा डालना पूरी तरह अस्वीकार्य है।
• लोग अपने प्रतिनिधियों को बोलने के लिए भेजते हैं, धरना पर बैठने के लिए नहीं, और न ही सदन में दिक्कतें पैदा करने के लिए।’राष्ट्रपति बनने से पहले कद्दावर सांसद रह चुके प्रणब ने कहा, ‘‘बाधा पैदा करने का मतलब है कि आप चोट पहुंचा रहे हैं, आप बहुमत की आवाज दबा रहे हैं ।
• सिर्फ अल्पमत ही सदन के बीचोंबीच आता है, नारेबाजी करता है, कार्यवाहियां रोकता है और ऐसे हालात पैदा करता है कि अध्यक्ष के पास सदन की कार्यवाही स्थगित करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है ’।
• प्रणब ने ऐसे समय में यह तीखी टिप्पणियां की हैं जब पिछले 15 दिनों से नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में गतिरोध जारी है। राष्ट्रपति ने कहा कि पूरे साल में महज चंद हफ्ते ही संसद का सत्र आयोजित होता है।
3. जीएसटी काउंसिल घटा सकती है टैक्स स्लैब
• जीएसटी काउंसिल भविष्य में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के स्लैब घटा सकती है। यह जानकारी देते हुए केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) के चेयरमैन नजीब शाह ने कहा कि इस प्रणाली के तहत प्राप्त कर राजस्व और राज्यों को दिए जाने वाले मुआवजे का विश्लेषण करने बाद काउंसिल इस बारे में फैसला कर सकती है।
• नोटबंदी के बाद उद्योग जगत जीएसटी की प्रस्तावित दरों में कटौती की मांग कर रहा है। फिलहाल जीएसटी दरों के प्रस्तावित स्लैब 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत हैं।
• शाह ने गुरुवार को यहां उद्योग चैंबर एसोचैम के एक कार्यक्रम में कहा कि केंद्र और राज्यों को अप्रत्यक्ष करों से फिलहाल आठ लाख करोड़ रुपये मिलते हैं। इनमें सीमा शुल्क शामिल नहीं है। जीएसटी प्रणाली के तहत भी इतनी ही राशि टैक्स के रूप में आनी चाहिए।
• टैक्स स्लैब में किसी भी बदलाव के बारे में राजस्व और छूटों व कटौतियों के आकलन का आकलन करने के बाद ही कोई फैसला लिया जा सकता है। इस बारे में जीएसटी काउंसिल को निर्णय लेने की पूरी छूट है।
• केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल ने नवंबर में चार स्लैब वाले ढांचे पर सहमति जताई थी। केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू होने के चलते पांच साल तक राज्यों को होने वाले राजस्व की भरपाई का वादा किया है। मोदी सरकार ने जीएसटी को अगले साल अप्रैल से लागू करने का लक्ष्य तय कर रखा है। जीएसटी में केंद्र व राज्यों के अधिकांश अप्रत्यक्ष कर शामिल हैं।
4. मोदी, पर्रिकर से मिले कार्टर रणनीतिक साझेदारी पर जोर
• अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर गुरुवार को भारत पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अपने भारतीय समकक्ष मनोहर पर्रिकर से मुलाकात की। इस दौरान भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हुई। कार्टर ने मोदी को जून में दोनों देशों के बीच बनी सहमति और फैसलों पर हुई प्रगति से भी अवगत कराया।
• प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में विकास और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
• मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग मजबूत बनाने के लिए कार्टर के योगदान की सराहना की। उन्होंने जून में की गई अपनी सफल अमेरिका यात्र की यादें भी ताजा कीं। अमेरिका के साथ ठोस और मजबूत द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी के लिए भारत की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
• इससे पहले जापान से रवाना होने के बाद कार्टर ने अमेरिका ने भारत को ‘उभरती हुई सैन्य ताकत’ और ‘बड़ा रक्षा साझीदार’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत की नियति ही भविष्य में अमेरिका का रणनीतिक साझीदार बनने की है क्योंकि दोनों देशों में काफी कुछ समान है।
• कार्टर ने कहा, ‘हमारे लोगों के बीच जुड़ाव बेहद मजबूत है। हम दोनों ही बहुसंस्कृति वाले देश हैं, लेकिन इसके बावजूद उनमें गजब की एकता भी है। इसलिए हममें काफी कुछ समान है। यह एक रिश्ता है जिसका हम सभी ने काफी लंबे तक इंतजार किया, लेकिन इसमें काफी तेजी से प्रगति हुई और पिछले कुछ सालों में यह काफी मजबूत हुआ है।’
• कार्टर ने पाकिस्तान को भारत, अफगानिस्तान और अमेरिकी सैन्य कर्मियों को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों को पनाह देने के लिए भी चेताया।
5. अमेरिका से संधि चाहता है क्यूबा
• अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नकारात्मक बयान की वजह से क्यूबा चाहता है कि दोनों देशो के बीच कुछ समझौतों पर अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासन काल में ही हस्ताक्षर हो जाए। ओबामा 20 जनवरी तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहेंगे।
• क्यूबा और अमेरिका के अधिकारियों ने हवाना में इस मुद्दे पर बैठक की कि कैसे उनके शासनकाल में दोनों देश और अधिक मुद्दों पर सहमति बना सकते है।
• अमेरिकी मामलों के क्यूबा के विदेश मंत्रालय के निदेशक जोसेफिना विडाल ने कहा, फिलहाल हम 12 और समझौते पर बातचीत कर रहे हैं ताकि इस निष्कर्ष पर पहुंच सके की उनमें से ज्यादातर पर हस्ताक्षर करने में सक्षम हो।
• उन्होंने कहा, यह समझौते भूकंप विज्ञान और मौसम विज्ञान जैसे क्षेाों में हो सकते हैं। रिश्ते सामान्य होने के बाद पिछले दो वर्षो में क्यूबा और अमेरिका ने पहले ही 12 समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा, क्यूबा और संयुक्त राज्य अमेरिका ने दशकों पुरानी शत्रुता को समाप्त कर संबंधों को सामान्य बनाने पर सहमत होने के बाद पिछले दो वर्षों से कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
• सुश्री विडाल ने क्यूबा को लेकर ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया लेकिन उन्होंने उम्मीद जतायी की उनका प्रशासन दोनों देशों के लोगों के बीच बढ़े सहयोग और संपर्क का समर्थन करेगा।
• इस साल क्यूबा की यात्रा करने वाले अमेरिकी लोगों की संख्या में 68 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और साल के पहले 10 माह में दो लाख से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों ने क्यूबा की यात्रा की है।
6. सार्क सम्मेलन हो या नहीं यह पाकिस्तान पर निर्भर : भारत
• दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के चार्टर-डे पर गुरुवार को भारत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। भारत का कहना है कि यह पाकिस्तान पर है कि वह सीमा पार से आतंकवाद को रोककर सार्क सम्मेलन को होने देना चाहता है अथवा नहीं। साथ ही भारत ने इस क्षेत्रीय संगठन के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से दोहराया भी है।
• गुरुवार को सार्क की 31वीं वर्षगांठ और 32वां चार्टर-डे था। इस मौके पर विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि पाकिस्तान में नवंबर में होने वाले सार्क सम्मेलन में कई सदस्य देशों ने यह कहते हुए भाग लेने से इन्कार कर दिया था कि एक विशेष देश क्षेत्र में सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है इसलिए सम्मेलन के लिए माहौल अनुकूल नहीं है।
• विकास स्वरूप ने कहा कि हालात अभी भी जस के तस हैं, लिहाजा सार्क सम्मेलन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, यह पाकिस्तान पर है कि वह यह कहे, उसने सार्क सम्मेलन आयोजित नहीं करने का फैसला किया है और वह इसे ऐसे किसी देश के लिए छोड़ने को तैयार है जो इसका आयोजन करना चाहता है। जिससे चीजें आगे बढ़ सकें।
• बता दें कि उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ने पर सितंबर में भारत ने सीमा पार से बढ़ते हमलों को कारण बताते हुए सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने की घोषणा की थी। माहौल बिगाड़ने के लिए पाक को अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान ने भी सम्मेलन में हिस्सा लेने से इन्कार कर दिया था।
7. नेपाल में संविधान संशोधन बिल को लेकर बढ़ा बवाल
• नेपाल की संसद में पेश किए गए संविधान संशोधन बिल को लेकर बवाल बढ़ता ही जा रहा है। इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रही मुख्य विपक्षी पार्टी सीपीएन-यूएमएल के कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ झड़प हो गई। इसमें 21 कार्यकर्ता घायल हो गए जबकि 70 को गिरफ्तार कर लिया गया है।
• विपक्षी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच बुधवार को कैलाली जिले में कई बार झड़प हुई। वे विधेयक में नए प्रांत के गठन के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। आंदोलनरत मधेशी और दूसरे समूहों की मांगों को पूरा करने के इरादे से इसका प्रस्ताव किया गया है।
• इस विधेयक को प्रधानमंत्री प्रचंड की अगुआई वाली गठबंधन सरकार ने पिछले हफ्ते संसद में सूचीबद्ध कराया है।
• इस बीच सीपीएन-यूएमएल ने सरकार से तुरंत पार्टी कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग की है। सीपीएन-यूएमएल समेत दूसरी विपक्षी पार्टियां यूएमएल और राष्ट्रीय जनमोर्चा ने संविधान संशोधन विधेयक के विरोध में बुधवार को संसद की कार्यवाही भी चलने नहीं दी।
• उल्लेखनीय है कि पिछले सितंबर में नया संविधान अपनाया गया था। इसके बाद से ही नेपाल राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। उसी समय से इसके खिलाफ मधेशी आंदोलनरत हैं। नेपाल के उप प्रधानमंत्री बिमलेंद्र निधि ने कहा कि उनकी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने संविधान संशोधन बिल का प्रस्ताव दिया था। यह विधेयक संसद में दो तिहाई बहुमत से पारित होगा।
8. शनि के चंद्रमा उस ग्रह से उम्मीद से कहीं ज्यादा गति से दूर हो रहे हैं
• शनि ग्रह के अध्ययन व उसकी खगोलीय स्थितियों का पता लगाने के उद्देश्य से वहां गए नासा के कैसिनी मिशन के हालिया आंकड़े बताते हैं कि शनि के चंद्रमा पूर्व के सभी अनुमानों की तुलना में कहीं अधिक युवा हैं।
• वैज्ञानिकों ने पहली बार शनि ग्रह के ‘‘लव नंबर’ को मापा है। ‘‘लव नंबर’ में एक ग्रह की कठोरता और घनत्व को मापा जाता है। वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि शनि के चंद्रमा उस ग्रह से उम्मीद से कहीं ज्यादा गति से दूर हो रहे हैं। ‘
• ‘अमेरिका की कान्रेल यूनिवर्सिटी’ के शोधार्थी रैडवान टेजडाइन ने बताया, ‘‘कैसिनी मिशन के इन आंकड़ों से शनि ग्रह की पण्राली को लेकर हमारे दृष्टिकोण अब बदल रहे हैं। हमारी पुरानी परिकल्पनाएं अब गलत साबित हो रही हैं।’
• शनि पर तरल हाइड्रोजन और तरल हीलियम की बहुलता है। इसके उभरे हुए कोर के बलों के कारण इसके चंद्रमा इससे थोड़ी दूर हो गए हैं। कोर ग्रह की अंदरूनी संरचना है। टेजडाइन ने बताया, ‘‘उसके दो मापदंड हैं-‘‘लव नंबर’ और ‘‘क्षय कारक’ जिन्हें अलग करना मुश्किल है।’
• टेजडाइन यूरोप के उस वैज्ञानिक दल के सदस्य भी हैं जो कैसिनी के आंकड़ों का विश्लेषण करता है। उन्होंने कहा कि शनि के चंद्रमा अनुमान से कहीं अधिक गति से उससे दूर हो रहे हैं।टेजडाइन ने कहा है कि शनि के ग्रहों की उत्पति अगर वास्तव में 4.5 अरब साल पहले हुई होती तो अभी उनकी मूल ग्रह से दूरी कहीं ज्यादा होती।
• पेरिस वेधशाला के वैलरी लेनी ने कहा, ‘‘शनि ग्रह के उपग्रहों को लेकर हमारी जो धारणा थी वह अब इस ‘‘कैसिनी मिशन’ के अंतिम आंकड़ों के साथ बदल सकती है।’ यह अध्ययन खगोलीय पत्रिका ‘‘इकारस’ में प्रकाशित हुआ है।
Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& E

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