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Sunday, December 11, 2016

दैनिक समसामयिकी 11 December 2016(Sunday)


1.अब राष्ट्रीय सूचना व संचार नीति लाएगी सरकार
• सरकार मीडिया जगत के बदलते आयामों को देखते हुए जल्द ही एक राष्ट्रीय सूचना व संचार नीति लेकर आएगी। इस नीति का मकसद तमाम मीडिया प्लेटफार्म में हो रहे बदलाव के नए परिदृश्य में आम लोगों की संचार जरूरतों का ख्याल रखना सुनिश्चत करना होगा। केंद्र सरकार राष्ट्रीय सूचना और संचार नीति को राज्यों के मशविरे से तैयार करेगी।
• सरकार के इस इरादे का एलान सूचना और प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने शनिवार को राज्यों के सूचना मंत्रियों के सम्मेलन में किया। उन्होंने कहा कि व्यापार से लेकर शिक्षा तक सभी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नीति है। मगर आजादी के बाद से अब तक सूचना संचार को लेकर कोई नीति नहीं है। 

• उनका कहना था कि बेशक लोगों को सूचनाओं से रूबरू कराना बुनियादी जरूरत है। मगर अब इस बात पर भी गौर करना होगा कि विकास के एजेंडे को सूचना व संचार के साथ जोड़ा जाए। इसके लिए एक राष्ट्रीय नीति समय की मांग है।
• केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सूचना और संचार की प्रस्तावित राष्ट्रीय नीति के मसौदे को राज्यों के साथ साझा कर उनकी राय ली जाएगी। इसके बाद एक व्यापक सहमति के आधार पर इस नीति को अमलीजामा पहनाया जाएगा।
• नायडू ने केंद्र सरकार की ओर से रायों में फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल सिनेमा के लिए सबसे दोस्ताना राय का पुरस्कार देने की भी घोषणा की। इस पुरस्कार के तहत विजेता राय को एक करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी।
• सूचना और प्रसारण मंत्री ने सम्मेलन के आखिर में सामुदायिक रेडियो को प्रोत्साहित करने के लिए राज्यों को सब्सिडी देने की भी घोषणा की। इसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों को सामुदायिक रेडियो स्टेशन की स्थापना के लिए 90 फीसद तो अन्य राज्यों को 75 फीसद की केंद्रीय सहायता मुहैया करायी जाएगी।
• सूचना प्रसारण राज्यमंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस मौके पर दूरदर्शन और आकाशवाणी की सूचना के प्रवाह को लोगों तक ले जाने में अहम भूमिका को रेखांकित किया।
• साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आकाशवाणी व दूरदर्शन दोनों राष्ट्रीय प्रसारकों को न केवल भौगोलिक तौर पर बल्कि अपने कार्यक्रमों की गुणवत्ता के आधार पर लोगों के साथ जुड़ाव बढ़ाना होगा।

2. हाई कोर्ट अनुशासनात्मक संस्था नहीं : आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले रद कर दी व्यवस्था
• सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के अधिकारों को लेकर नई व्यवस्था दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट एक अनुशासनात्मक संस्था नहीं है, लिहाजा वह दंड का निर्धारण नहीं कर सकता है। चाहे गलती करने वाले कर्मचारी को नियोक्ता की ओर से दिया गया दंड कितना भी अनुचित क्यों न हो, हाई कोर्ट को सजा देने का अधिकार नहीं है? शीर्ष कोर्ट के अनुसार, इस तरह के मामलों में जुर्माना लगाने या सजा देने का अधिकार संबंधित अनुशासनात्मक प्राधिकरण को ही है।
• के. हनुमंत राव प्राथमिक कृषि सहकारी समिति में सुपरवाइजर थे। दायित्वों का निर्वाह नहीं करने में दोषी पाए जाने पर कृष्णा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया था। राव ने इसे आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
• एक जज की पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन खंडपीठ ने बैंक द्वारा दी गई उनकी सजा में संशोधन कर दिया। कोर्ट ने तीन वर्षो तक राव के दो वेतन वृद्धि पर रोक लगाते हुए उनकी सेवा बहाल कर दी थी।
• फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए सिर्फ अपवाद सरीखे मामले में ही हस्तक्षेप करने की व्यवस्था दी है।
3. तेल उत्पादन में कटौती पर सहमति, भारत को झटका
• अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड) की अधिकता और कम कीमतों की समस्या से निपटने के लिए ओपेक और अन्य उत्पादक देशों के बीच सहमति बन गई है। 2001 के बाद यह पहला मौका है जब तेल निर्यातक देशों का संगठन ओपेक और रूस जैसे नॉन-ओपेक देश उत्पादन में कटौती के लिए तैयार हो गए हैं।
• ओपेक के बाहर के देशों (नॉन-ओपेक) ने उत्पादन में 5,62,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) की कटौती पर हामी भरी है। ओपेक के 13 देशों में कटौती का सबसे ज्यादा भार सऊदी अरब उठाने के लिए तैयार हुआ है।
• इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में निश्चित तौर पर तेजी आएगी। लिहाजा, भारत जैसे तेल आयातक देश इससे प्रभावित होंगे। इसकी वजह से आगे पेट्रोलियम उत्पादों में तेजी देखने को मिल सकती है।
• ओपेक और नॉन-ओपेक देशों ने लंबी बहस के बाद आखिरकार यहां इस बाबत समझौते पर हस्ताक्षर किए। अब नजरें इस बात पर होंगी कि इस एग्रीमेंट पर किस हद तक अनुपालन होता है।
• ओपेक का उत्पादन कोटे में बेईमानी का लंबा इतिहास रहा है। जबकि रूस उत्पादन में कटौती को लेकर अनिछुक रहा है। ओपेक के महासचिव मुहम्मद बारकिंदो ने कहा कि यह बैठक ऐतिहासिक रही है। यह कदम ग्लोबल अर्थव्यवस्था में जान फूंकेगा। इससे आर्थिक सहयोग व विकास संगठन यानी ओईसीडी के कुछ देशों को अपने महंगाई के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।
• ओपेक में 30 नवंबर को मासिक उत्पादन घटाने पर सहमति बनी थी। उसने जनवरी से उत्पादन को 12 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) घटाकर 3.25 करोड़ बीपीडी करने का फैसला किया था। डील के तहत ओपेक यह भी चाहता था कि अन्य तेल उत्पादक देश भी छह लाख बीपीडी तक कटौती करें। नॉन-ओपेक देश उत्पादन में 5,62,000 बीपीडी की कटौती के लिए तैयार हुए हैं।
4. चीन तथा नेपाल के बीच नयी कार्गो सेवा शुरू
• चीन व्यापार के बहाने नेपाल तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने में जुटा है। इसे आगे बढ़ाते हुए तिब्बत और नेपाल के बीच नई कार्गो सेवा शुरू कर दी गई है। तिब्बत के जिरोंग से काठमांडू के लिए 28 लाख डॉलर मूल्य (18.89 करोड़ रुपये) का माल रवाना किया गया है।
• मधेशी आंदोलन के वक्त भारत से लगती सीमा से जरूरी सामान की आपूर्ति ठप हो गई थी। इसके बाद भारत पर निर्भरता कम करने के लिए नेपाल ने चीन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी थी।
• नई कार्गो सेवा के तहत चीन ने औद्योगिक क्षेत्र गुआंगडोंग-तिब्बत-नेपाल के लिए रेल और सड़क मार्ग शुरू कर दिया है।
• शिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक सिल्क रोड (बेल्ट एंड रोड) रणनीति के तहत चीन ने शुक्रवार को नए व्यापार मार्ग की शुरुआत की है। माल ढुलाई को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में गुआंगडोंग की राजधानी गुआंगझाऊ से जूते, कपड़े, टोपियां, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान और निर्माण सामग्री के साथ मालगाड़ी को शीगेज (तिब्बत) के लिए रवाना किया गया था। इसकी कुल दूरी 5,200 किलोमीटर है।
• दूसरे चरण में 870 किलोमीटर की दूरी सड़क मार्ग से पूरी की जाएगी। जिरोंग से दर्जनों ट्रकों को माल के साथ काठमांडू के लिए रवाना कर दिया गया है। समुद्र के जरिये गुआंगझाओ से जिरोंग पहुंचने में 20 दिन लगते हैं, जबकि नए मार्ग से पांच से छह दिन लगेंगे। भविष्य में इसे चार दिनों के अंदर तक लाया जाएगा।
• पुष्प कमल दहल प्रचंड के नेपाल की कमान संभालने के बाद चीन से आने वाली यह पहली खेप होगी। बीजिंग के प्रति नरम रुझान रखने वाले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस साल मार्च में बीजिंग के साथ ट्रांजिट ट्रेड करार किया था।
• पुष्प कमल दहल प्रचंड के सत्ता में आने के बाद इसमें विलंब हुआ। हालांकि, गोवा में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में प्रचंड और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच मुलाकात हुई थी। चीन ने मई में पश्चिमोत्तर चीन स्थित लानझाओ और काठमांडू के बीच रेल और रोड कागरे सेवा शुरू की थी।
5. द. कोरिया : महाभियोग मामला संवैधानिक पीठ के पास
• दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क ग्वेन हे पर देश की संसद में महाभियोग वोट के बाद अब मामला नौ जजों वाली संवैधानिक अदालत में चला गया है। अदालत उन लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर सकती है जो राष्ट्रपति को पद से हटाने के पक्ष में हैं।
• शुक्रवार को सांसदों के वोट के कारण राष्ट्रपति की व्यापक कार्यकारी शक्तियां समाप्त हो गई लेकिन अदालत में दो-तिहाई बहुमत मिलने के बाद ही फैसले को अंतिम मंजूरी मिलेगी। अदालत की यह प्रक्रि या काफी लंबी और अनिश्चित है जिसमें छह महीने तक का समय लग सकता है।
• अदालत पार्क का समर्थन कर सकती है क्योंकि इसके नौ जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति और उनके पूर्ववर्ती कंजव्रेटिव ली म्युंग बाक द्वारा की गई है। हालांकि जनता पार्क को पद से और राष्ट्रपति कार्यालय ब्लू हाउस से हटाना चाहती है।
• हाल ही में हुए जनमत सव्रेक्षणों में 80 फीसदी लोगों ने महाभियोग का समर्थन किया है। इसलिए न्यायाधीश पर संसद के निर्णय को मानने का बहुत अधिक दबाव है।पार्क का पतन एक घोटाले में उनके करीबी दोस्त चोई सून-सिल के शामिल होने के बाद शुरू हो गया था।
• पार्क पर गोपनीय सरकारी दस्तावेज लीक करके चोई को देने का भी आरोप है। महाभियोग के 40 पन्ने वाले विधेयक में राष्ट्रपति पर कई संवैधानिक और अपराधिक उल्लंघनों का आरोप लगाया गया है।
6. सीरिया में तत्काल हिंसा रोकने पर भारत ने वोट नहीं दिया
• सीरिया में तत्काल हिंसा रोकने और पीड़ित लोगों को सहायता देने संबंधी प्रस्ताव पर भारत ने वोट नहीं दिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस प्रस्ताव के पक्ष में 122 और विरोध में 13 देशों ने वोट दिए। भारत सहित 36 देश अनुपस्थित रहे। प्रस्ताव कनाडा ने पेश किया था।
• प्रस्ताव में सीरिया और खास कर अलेप्पो में हिंसा में वृद्धि को लेकर 'गुस्से' का इजहार किया गया था। 193 देशों की सदस्यता वाली महासभा ने प्रस्ताव मंजूर कर लिया। भारतीय राजनयिक सूत्रों ने बताया कि भारत अपने परंपरागत दृष्टिकोण के कारण मतदान से अनुपस्थित रहा। उनके अनुसार भारत मानवीय मुद्दों को राजनैतिक मुद्दों के साथ नहीं मिलाता।
• प्रस्ताव में बहुत से मानवीय और राजनैतिक मुद्दों को एक साथ रखा गया था, जो 'विवादास्पद' हैं। चीन, रूस, ईरान और सीरिया ने प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया वहीं बांग्लादेश, इराक, लेबनान, म्यांमार, पाकिस्तान और नेपाल ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
7. अंतरिक्ष में तैर रहे हैं 10 करोड़ से ज्यादा स्पेस जंक, इन्हें 700 मीटर लंबे जाल में बटोरकर जलाएगा कार्गो जहाज
• भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान शुरू किया है। वहीं, जापान में शिंजो आबे सरकार अंतरिक्ष में सफाई अभियान शुरू करने जा रही है।
• अंतरिक्ष में फैले कचरे को बटोरने के लिए अगले महीने एक कार्गो जहाज भेजा जाएगा। इसके लिए 700 मीटर लंबा जाल बनाया गया है। इसे जापान में मछली पकड़ने का जाल बनाने वाली 106 साल पुरानी कंपनी नितो सिमो ने बनाया है।
• नासा के मुताबिक पृथ्वी की कक्षा में 10 करोड़ से ज्यादा स्पेस जंक के टुकड़े फैले हुए हैं। इनमें पुराने सैटेलाइट के बेकार हो चुके उपकरण, टूल्स और राॅकेट के बिट्स आदि शामिल हैं। इसे अंतरिक्ष से तुरंत हटाने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो इनसे टकराने वाली कोई भी चीज खत्म हो सकती है।
• दरअसल, नितो सिमो कंपनी पिछले 10 साल से जापानी स्पेस जाक्सा एजेंसी के साथ मिलकर इस जाल को बनाने में जुटी थी। ताकि स्पेस में फैले कचरे को समेटा जा सके। इस परियोजना के हेड कोइचि इनोउ ने बताया कि 'स्पेस एजेंसी अगले महीने इसका ट्रायल करेगी। यह प्रयोग अंतरराष्ट्रीय सफाई मिशन का एक अहम हिस्सा है।
• मकसद अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और करीब 6.74 लाख करोड़ रुपए के अंतरिक्ष स्टेशनों का बचाव करना है। अंतरिक्ष में सैटेलाइट और रॉकेट का फैला कचरा करीब 28,165 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है। इस कचरे का छोटा सा हिस्सा भी किसी भी कम्युनिकेशन नेटवर्क को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, किसी अंतरिक्षयात्री को इससे नुकसान नहीं पहुंचा है, पर कुछ सैटेलाइट को नुकसान हुआ है।'
• कार्गो जहाज का नाम स्ट्रोक है। जापानी भाषा में इसे कोउनोटोरी कहते हैं। यह अंतरिक्ष में फैले कचरे को पहले जाल में इकट्‌ठा करेगा। फिर उसे नार्थ पैसेफिक सागर के ऊपर स्थित तानेगाशिमा स्पेस सेंटर पर जला देगा।
• शोधकर्ताओं का कहना है कि जाल में लगी लुब्रीकेटेड और इलेक्ट्रो डाॅयनमिक रस्सियों से इतनी ऊर्जा उत्पन होगी की कचरे अपने आप खिंचे चले आएंगे। जहाज से इस कचरे को जैसे ही वातावरण में धक्का दिया जाएगा, वे खुद जल जाएंगे।
• यह जाल एल्युमिनियम और स्टील वायर की रस्सियों से बनाया गया है। स्पेस एजेंसी जाक्सा ने नितो सिमो कंपनी को इस विशेष जाल को विकसित करने के लिए सरकार ने कहा था। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि 'जाक्सा ऐसा जाल चाहता था जो काफी मजबूत हो। ये काफी मुश्किल काम था।'
• नासा के मुताबिक अंतरिक्ष में करीब 5 लाख टुकड़े ऐसे तैर रहे हैं, जिनकी लंबाई एक से 10 सेंटीमीटर के बीच है।
• स्पेस जंक के करीब 21000 टुकड़े 10 सेंटीमीटर से बड़े हैं। इसके अलावा दस करोड़ टुकड़े एक सेंटीमीटर से छोटे हैं।
• ज्यादातर टुकड़े 2000 किमी की रफ्तार से पृथ्वी की कक्षा में घूम रहे हैं।
• केवल 7 फीसदी स्पेस जंक सही हैं।
• अमेरिका ने स्पेस जंक को ट्रैक करने के लिए करीब 1 बिलियन डॉलर नई ट्रैकिंग डिवाइस बनाने पर खर्च किया है।
Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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