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Friday, December 16, 2016

दैनिक समसामयिकी 15 December 2016(Thursday)


1.दिव्यांग विधेयक-2014 लोकसभा से पास
• दिव्यांगों से भेदभाव को अब अपराध माना जाएगा। पहली बार दिव्यांगों के साथ भेदभाव करने वाले अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का प्रावधान किया जा रहा है। संसद का पूरा शीतकालीन सत्र नोटबंदी से उपजे विवाद की भेंट चढ़ने को है।
• ऐसे में बुधवार को पूरा सदन दिव्यांगों के मसले पर एक साथ खड़ा नजर आया। सत्र समाप्त होने से केवल तीन दिन पहले राज्यसभा ने दिव्यांग विधेयक-2014 पारित कर दिया। दिव्यांगों से भेदभाव को दंडनीय अपराध बनाने वाला यह विधेयक 120 संशोधनों के साथ सर्वसम्मति से पारित किया गया है।
• राज्यसभा इस सत्र में अब तक सिर्फ यही एक बिल पारित कर पाई है। 

• दिव्यांग व्यक्ति अधिकार वाला यह विधेयक पुराने दिव्यांग अधिनियम-1995 का स्थान लेगा। इस नए कानून से दिव्यांगों के मौलिक अधिकारों का संरक्षण हो सकेगा। 2011 में हुई जनगणना के अनुसार भारत में दो करोड़ से ज्यादा लोग किसी-न-किसी रूप में दिव्यांग हैं।
 • नए विधेयक में 21 नई दिव्यांगता को शामिल किया गया है। इसके चलते दिव्यांगों की संख्या बढ़ जाएगी। नया कानून बन जाने से तकरीबन 10 करोड़ लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
• सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विधेयक पर सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इससे दिव्यांगों को समाज में सम्मानीय स्थान बनाने में मदद मिलेगी।
• उन्होंने कहा कि विधेयक में दिव्यांगों की श्रेणी में वृद्धि की गयी है, जिससे अधिक-से-अधिक लोगों को इसका लाभ मिलेगा। पुराने बिल के मुकाबले संशोधित विधेयक में 40 फीसद से ज्यादा दिव्यांग लोगों को नौकरी, शिक्षा और सरकारी योजनाओं में आरक्षण मिलेगा।
• निजी कंपनियों की इमारतों में दिव्यांगों के आने-जाने के लिए रैंप और अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
• विधेयक में दिमागी रूप से बीमार लोगों के अभिभावक बनाने को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके लिए जिला अदालतें दो तरह का प्रावधान कर सकती हैं।
• विधेयक में निशक्तजनों के लिए आरक्षण की व्यवस्था तीन से बढ़ाकर चार फीसद कर दी गई है।
• भेदभाव की स्थिति में छह महीने से लेकर दो साल तक की कैद और 10 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
• एक मेडिकल बोर्ड बनाया जाएगा जो निशक्तता को परिभाषित करेगा।
• 18 साल से कम उम्र के निशक्त व्यक्तियों को पेंशन का मुद्दा नहीं है।
• मानसिक बीमारी की वही परिभाषा विधेयक में है जिसका उल्लेख संयुक्त राष्ट्र संधि में किया गया है।
• निशक्त व्यक्तियों का यूनीवर्सल कार्ड बनाया जाएगा जो पूरे देश में मान्य होगा। दपहले निशक्तता से संबंधित कार्ड स्थानीय स्तर पर ही मान्य होता था।
• तरह के कार्ड बनवाने का काम शुरू कर दिया गया है। अगले डेढ़ साल में यह काम पूरा हो जाएगा।
• सरकार केरल में दिव्यांग विविद्यालय बना रही है। यह अगले साल से शुरू हो जाएगा।
• निशक्त व्यक्तियों की पहले सात श्रेणियां थीं और अब 21 कर दी गई है।
• निशक्तता में अब मानसिक विकार, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार, सेरेबल्र पाल्सी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल

2. संसदीय समिति ने की रेलवे में मेंबर-सेफ्टी पद की वकालत
• रेलवे से जुड़ी संसदीय समिति ने ट्रेन दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे बोर्ड में सदस्य यातायात का पद सृजित करने की सिफारिश की है। साथ ही संरक्षा के लिए अलग से विशेष कोष गठन किए जाने का सुझाव भी दिया है।
• तृणमूल कांग्रेस सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट बुधवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि संरक्षा के मोर्चे पर कई कदम उठाने के बावजूद रेल मंत्रलय पुरानी पटरियों को तेजी से बदलने तथा संरक्षा श्रेणी के सवा लाख रिक्त पदों को भरने में असमर्थ रहा है। परिणामस्वरूप ट्रेनों के पटरी से उतरने के हादसे बढ़ गए हैं।
• समिति के अनुसार 2003-04 से लेकर 2015-16 के दौरान हुई दुर्घटनाओं का दूसरा प्रमुख कारण ट्रेनों का पटरी से उतरना था। 2003-04 में हुई 239 दुर्घटनाओं में 208 (85 फीसद) ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण हुई थीं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि 2016-17 में भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
• हाल में हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस दुर्घटना इसका प्रमाण है जिसमें 149 लोगों की मौत हो गई, जबकि 180 से यादा लोग घायल हो गए। समिति ने रेल मंत्रलय के 2015-16 के संरक्षा निष्पादन दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा है कि इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मजबूत पटरियां सुरक्षित रेल परिवहन प्रणाली का मेरुदंड हैं। इसके बावजूद पुरानी पटरियों को बदलने का रेलवे का रिकार्ड संतोषजनक नहीं है।
• पटरियों को दुरुस्त रखने के लिए आदर्श रूप में हर साल 4500 किलोमीटर पुरानी पटरियां हटाकर उनकी जगह नई पटरियां बिछाई जानी चाहिए। लेकिन हकीकत में इससे बहुत कम ट्रैक का नवीकरण होता है।
• उदाहरण के लिए इस समय 5000 किलोमीटर पटरियां ऐसी हैं जिन्हें तत्काल बदले जाने की जरूरत है। इसके बावजूद चालू वित्तीय वर्ष में केवल 2700 किलोमीटर ट्रैक नवीकरण का लक्ष्य रखा गया है।
3. डगमगाने लगा विकास दर पर भरोसा
• नोटबंदी के 36 दिनों के बाद दुनिया की रेटिंग एजेंसियों, आर्थिक मामलों पर सलाह देने वाली एजेंसियों और अधिकांश अर्थविदों में यह आम राय बनती जा रही है कि इस फैसले से कम से चालू साल के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बड़ा झटका लग सकता है।
• कुछ एजेंसियों ने तो इस बात के संकेत देने लगी है कि वर्ष 2016-17 में भारत की आर्थिक विकास दर की रफ्तार घटकर छह फीसद के करीब रह सकती है।
• पिछले दो दिनों के भीतर स्टैंडर्ड एंड पुअर्स, बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच और एशियाई विकास बैंक ने नोटबंदी और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर जो रिपोर्ट जारी की हैं, उसे किसी भी तरह से उत्साहजनक नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें अगले महीने आर्थिक विकास दर को लेकर जारी होने वाले आंकड़ों पर हैं।
• कुछ माह पहले भारत की विकास दर के अनुमान को लेकर अधिकांश एजेंसियों की राय थी कि यह 7.5 फीसद या इससे ऊपर रहेगी। लेकिन अब एशियाई विकास बैंक ने कहा है कि यह 7 फीसद के आसपास रहेगी।
• आर्थिक सलाहकार एजेंसी नोमुरा ने तीसरी तिमाही के लिए विकास दर के अनुमान को घटाकर 6 फीसद कर दिया है जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए 6.8 फीसद कर दिया गया है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चालू तिमाही में तो विकास दर घटकर 5.6 फीसद रह जाएगी।
• स्टैंडर्ड एंड पुअर्स की तरफ से बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। आर्थिक विकास दर के पटरी पर लौटने में वक्त लगेगा। सनद रहे कि भारतीय रिजर्व बैंक ने भी पिछले हफ्ते आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटा दिया था।
• आरबीआइ के आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी लागू होने के बाद बैंकों से कर्ज लेने की रफ्तार और घटी है। वैसे बैंकों से कर्ज लेने के आंकड़े लंबे समय से कोई उत्साहजनक तस्वीर पेश नहीं कर रहे हैं। लेकिन 25 नवंबर, 2016 को समाप्त पखवाड़े में बैंकों की तरफ से वितरित होने वाले कर्ज में 0.8 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है जो पिछले कई महीनों के दौरान सबसे खराब स्थिति है।
• अगर एक अप्रैल से 25 नवंबर, 2016 की स्थिति देखें तो कर्ज की राशि में तकरीबन एक लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। साफ है कि आम जनता के साथ ही उद्योग जगत भी कर्ज लेने से कतरा रहे हैं।
4. यूएन महासचिव ने की भारत के सहयोगी रुख की प्रशंसा
• संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने अंतरराष्ट्रीय संस्था में भारत के सहयोग की प्रशंसा की है। कहा है कि संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न क्षेत्रों की कार्य योजनाओं में भारत का सहयोग एकजुटता की भावना को मजबूत करता है।
• गुतेरस ने यह बात भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर से मुलाकात में कही है। संयुक्त राष्ट्र के नौ वें महासचिव के रूप में शपथ लेने के बाद गुतेरस से मुलाकात करने के लिए जयशंकर न्यूयॉर्क गए हैं।
• जयशंकर ने गुतेरस को महासचिव पद की शपथ लेने पर बधाई देते हुए आश्वस्त किया कि संयुक्त राष्ट्र की समन्वित विकास, शांति और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों में भारत का योगदान भविष्य में भी बना रहेगा।
• विदेश सचिव ने सहायक महासचिव जेफ्रे फेल्टमैन और अन्य अधिकारियों से भी मुलाकात करके आपसी सहयोग के विषयों पर वार्ता की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने जयशंकर की गुतेरस व अन्य अधिकारियों से मुलाकात की तस्वीरें ट्विटर पर डाली हैं।
• गुतेरस ने सोमवार को महासचिव पद की शपथ ली है। महासचिव के रूप में बान की मून का दस साल का कार्यकाल आगामी 31 दिसंबर को पूरा होगा। उसके अगले ही दिन गुतेरस महासचिव का पदभार संभालेंगे। शपथ लेने के बाद गुतेरस ने प्रक्रिया से यादा परिणाम देने पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही थी। साथ ही यह संकल्प भी लिया था कि वह लंबे समय से चले आ रहे विवादों के हल और 71 साल पुरानी वैश्विक संस्था में सुधार के लिए निजी तौर पर ध्यान देंगे।
• 1995 से 2002 तक पुर्तगाल के प्रधानमंत्री रहे गुतेरस 2005 से 2015 तक संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी मामलों के उचायुक्त भी रह चुके हैं।
5. एनएसजी में भारत को छूट पर पाकिस्तान ने दुनिया को चेताया
• पाकिस्तान ने एनएसजी में प्रवेश के मामले में भारत के समर्थन के लिए छोटे सदस्य देशों पर दबाव डालने के लिए दुनिया के शक्तिशाली देशों को सावधान किया है। कहा है कि दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थिरता के मामले में उसकी भूमिका को कम करके नहीं आंका जाए।
• एनएसजी (परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह) की सदस्यता के लिए उसके दावे को भारत के आवेदन से कम करके बिल्कुल न देखे।
• यह बात पाकिस्तानी विदेश मंत्रलय में निशस्त्रीकरण अनुभाग के महानिदेशक कामरान अख्तर ने एक कार्यशाला में कही है। उन्होंने कहा कि 48 सदस्य देशों वाले इस खास समूह में भारत को प्रवेश दिलाने के लिए शक्तिशाली देश अपने सहयोगी छोटे देशों पर दबाव डाल रहे हैं।
• जबकि सदस्यता के लिए पूरी प्रक्रिया नियमानुसार चलनी चाहिए। सभी देशों के लिए समान नियम के तहत कार्य होना चाहिए। हमें विश्वास है कि एनएसजी के सदस्य देश भारत को किसी तरह की छूट नहीं देंगे।
• अख्तर ने कहा, भारत को एनएसजी का सदस्य बनाने का असर न केवल पाकिस्तान पर पड़ेगा बल्कि शांतिपूर्ण कार्यो के लिए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहे कई देशों को यह अपने साथ अन्याय महसूस होगा।
• इससे परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत न करने वाले देशों के भी हौसले बुलंद होंगे। कार्यशाला का आयोजन इस्लामाबाद की संस्था सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज और लंदन की इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज ने संयुक्त रूप से किया था। उल्लेखनीय है कि एनएसजी के यादातर सदस्य देश सदस्यता के मामले में भारत के दावे का समर्थन कर रहे हैं। जबकि चीन एनपीटी पर दस्तखत की शर्त का हवाला देकर भारत का रास्ता रोक रहा है।
6. डब्ल्यूएचओ का अंदेशा, मलेरिया से भारत में 25,740 की हुई मौत
• देश में मलेरिया की हकीकत को लेकर भारी असमंजस की स्थिति है। इससे होने वाली मौत को लेकर भारत सरकार के आंकड़ों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुमान में दो-चार गुना नहीं बल्कि 67 गुना का फर्क है।
• सरकार का दावा है कि बीते वर्ष के दौरान देश में 11.69 लाख लोगों को मलेरिया हुआ और सिर्फ 384 की मौत हुई। जबकि डब्ल्यूएचओ का अंदाजा है कि कुल 1.27 करोड़ लोग इससे बीमार हुए और उनमें से 25,740 की मौत हुई।
• विशेषज्ञों का भी मानना है कि सुदूर और आदिवासी इलाकों में होने वाले और निजी डॉक्टरों से इलाज करवाने वाले यादातर मामले सरकारी रिकार्ड में दर्ज नहीं हो पाते।
• मलेरिया पर निगरानी रखने के लिए जवाबदेह केंद्र सरकार की एजेंसी राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी) तक मलेरिया के मामलों की जानकारी बहुत कम ही पहुंच पाती है।
• विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)की ओर से मंगलवार को जारी ‘विश्व मलेरिया रिपोर्ट’ में आशंका जताई गई है कि दुनिया भर के मलेरिया के छह फीसद मरीज भारत में हैं और इससे होने वाली छह फीसद मौतें भी यहीं होती हैं।
• डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में जिन लोगों के योगदान का उल्लेख किया गया है उनमें एनवीबीडीसीपी के निदेशक एसी धारीवाल भी शामिल हैं। हालांकि लगातार प्रयासों के बावजूद धारीवाल सहित केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रलय का कोई भी अधिकारी इस पर टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हुआ।
• इतने बड़े अंतर के बारे में पूछने पर पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पीके होता मानते हैं कि बड़ी संख्या में मलेरिया के मामले सरकारी रिकार्ड में दर्ज ही नहीं हो पाते।
• उन्होंने कहा, ‘यह गरीबों की बीमारी मानी जाती है। निजी क्षेत्र इसके बारे में सरकार को जानकारी नहीं देता। इसी तरह ज्यादातर मामले आदिवासी और सुदूर इलाकों में होते हैं, जहां इनकी रिपोर्टिग ठीक से नहीं हो पाती।
• साथ ही हमारे स्वास्थ्य ढांचे को देखते हुए इसकी पहचान उतनी आसान भी नहीं है।’ लेकिन साथ ही कहा कि डब्ल्यूएचओ का अनुमान भी 30 से 40 फीसद यादा हो सकता है। 2006 में एचआइवी एड्स पर रिपोर्ट में अंदाजा लगाया गया था कि भारत में 57 लाख मरीज हैं, जबकि 2.10 लाख सैंपल की जांच के आधार पर पाया गया कि यह संख्या वास्तव में सिर्फ 28 लाख ही है।
• वैसे दुनिया भर में जहां मलेरिया के मामलों में तेजी से कमी लाने में कामयाबी हासिल हो रही है, वहीं भारत में सरकारी आंकड़ों में भी वर्ष 2012 के मुकाबले 2015 में यह संख्या बढ़ ही गई है। विश्व मलेरिया रिपोर्ट के मुताबिक मलेरिया के मामले में हमारा देश बस नाइजीरिया व कांगो से ही पीछे है।
• रिपोर्ट के मुताबिक बीते वर्ष के दौरान दुनिया भर में करीब 21.2 करोड़ लोग मलेरिया से प्रभावित हुए जबकि 4.29 लाख मौतें हुईं।
7. एक हफ्ते में बन जाएगा सिंधु जल संधि पर कार्य बल
• केंद्र सरकार ने सिंधु जल संधि पर कार्य बल के ब्योरे को अंतिम रूप दे दिया है। इस कार्य बल का गठन एक हफ्ते के भीतर किया जाएगा, जिसका मकसद पाकिस्तान में प्रवाहित होकर बर्बाद होने वाले नदी के पानी को रोकना है।एक सूत्र ने बताया, सरकार सीमाई राज्य पंजाब और जम्मू-कश्मीर में किसानों के लिए उनकी जरूरत से ज्यादा पानी सुनिश्चित करना चाहती है।
• भारतीय नदियों से बहकर पाकिस्तान में जाने वाले और वहां बर्बाद हो जाने वाले पानी को रोक कर ऐसा आसानी से किया जा सकता है। साल 1960 की सिंधु जल संधि के दायरे में छह नदियों-व्यास, रावी, सतलज, सिंधु, चिनाब और झेलम-के जल वितरण और साझा करने के अधिकार आते हैं। सूत्र ने कहा, सिंधु जल संधि पर कार्य बल की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
• कार्यबल में छह-सात सदस्य होंगे और एक हफ्ते के भीतर इसका गठन किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि सतलज, व्यास, रावी का पानी भारत का है और पाकिस्तान में उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। मोदी ने एक जनसभा में कहा था कि इस पानी की एक-एक बूंद रोक दी जाएगी और पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर के किसानों को दी जाएगी।
• इस बीच, 1960 में संधि के लिए मध्यस्थता कर चुके विश्व बैंक ने सिंधु जल संधि के तहत भारत और पाकिस्तान की ओर से शुरू की गई अलग-अलग प्रक्रि याओं पर रोक लगा दी है ताकि दोनों देश अपने मतभेद सुलझाने के लिए वैकल्पिक उपायों पर विचार कर सकें।
Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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