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Saturday, April 01, 2017

भारत स्टेज (बीएस) क्या है?

भारत स्टेज (बीएस) क्या है?
- व्हीकल्स में फ्यूल से होने वाले पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए एक स्टैंडर्ड तय किया जाता है। इसे इमिशन नॉर्म्स कहते हैं।
- जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी में बदलाव आता है और एक्सपेरिमेंट्स के जरिए पॉल्युशन कम करने के तरीके तलाशे जाते हैं, जिसके साथ इमिशन नॉर्म्स भी बदलते हैं। 

- इन नॉर्म्स के तहत व्हीकल्स तैयार करना हर कंपनी के लिए जरूरी होता है, ताकि इससे एयर पॉल्यूशन कम किया जा सके। नए स्टैंडर्ड के तहत फ्यूल भी बदला जाता है।
- अभी भारत में बीएस-IV स्टैंडर्ड चल रहा है। इसे यूरो-IV भी कहा जाता है।
- भारत सरकार ने तय किया है कि वह बीएस-V को छोड़कर सीधे बीएस-VI स्टैंडर्ड लागू करेगी। इसके 2020 तक लागू होने की उम्मीद है।
बीएस-4 वाले फ्यूल का फायदा
- यह कार्बन मोनो ऑक्साइड को 56% कम कर देगा। इस गैस से सरदर्द और उल्टी की शिकायत होती है।
- फ्यूल जलने से निकलने वाले हाइड्रोकॉर्बन से सिर दर्द की शिकायत होती है। बीएस-4 इसके असर को 50% कम कर देगा।
- पार्टिकुलेट मैटर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। नया मानक इसका असर 80% कम कर देगा।
- नाइट्रोजन से खांसी होती है, आंखों पर असर होता है। बीएस-4 से यह असर 47% तक कम हो जाएगा।

यही ऑफर अगर जर्मनी या जापान में दिया गया होता तो अब तक टू व्हीलर कंपनियाँ सड़क आ जातीं, खरीदने वाले ढूंढने से नहीं मिलते लेकिन भारत में उल्टा हो रहा है।
भाई साहब, कोई भी देश अपने आप महान नहीं बनता, उसको महान बनाना पड़ता है और महान बनाने वाले होते हैं उसके नागरिक। जर्मनी और जापान ऐसे ही न बन गए। उनको महान बनाया उनके नागरिकों ने और हमारे देश के नागरिक क्या कर रहे हैं? जानबूझकर जहर खरीद रहे हैं, अपने ही शहरों को गैस चेम्बर बनाने में लगे हैं। ये जानते हुए भी कि BS 3 जहर फेंकेगी।
पर सबकी एक ही सोच..... अब फेंकती है तो फेंकती रहें पर अपनी तशरीफ़ के नीचे तो तीस हज़्ज़ार रुपल्ली सस्ती मोटर साईकल आ जानी चाहिए, पर्यावरण की हिफाज़त करेगा अपना पडोसी, अपन क्यों दिमाग पर लोड लें ?
हम तो सिर्फ अपना निकटतम लाभ देखेंगे जिसको देश का सोचना है सोचे हमको क्या? भले हमारा ही बर्बादी क्यों न हो... फिर सर्कार और समाज को दोषारोपण करते रहेंगे!

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